उत्तर प्रदेश को आगरा और प्रयागराज में दो बड़े औद्योगिक क्लस्टर मिले, यूपीसीडा इन आईएमसी का करेगी विकास


केंद्र सरकार ने पूर्वी और पश्चिमी यूपी में संतुलित विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यूपीसीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी मयूर माहेश्वरी को भेजे गए एक पत्र में इन आईएमसी की स्थापना का प्रस्ताव मंजूर किए जाने के बारे में जानकारी दी


lucknow | मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारे (एकेआईसी) में दो एकीकृत विनिर्माण क्लस्टर (आईएमसी) विकसित किया जा रहा है। राज्य सरकार हाल के दिनों में एक्सप्रेसवे के इर्द-गिर्द चौतरफा सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने का उदाहरणीय बदलाव हासिल करने में सक्षम रही है। इन दोनों आईएमसी, यानी प्रयागराज में सरस्वती हाई टेक सिटी और आगरा में एक ग्रीनफील्ड साइट, को एक्सप्रेसवे के निकट बहुविध-सम्पर्कीयता के साथ विकसित करने की परिकल्पना की गई है ताकि उन्हें अन्य प्रमुख औद्योगिक और आर्थिक क्षेत्रों के साथ निर्बाध परिवहन एवं आपूर्ति की सुविधा प्राप्त हो सके।
उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी मयूर माहेश्वरी को भेजे गए एक पत्र में केंद्र सरकार ने पूर्वी और पश्चिमी यूपी में संतुलित विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इन आईएमसी की स्थापना का प्रस्ताव मंजूर किए जाने के बारे में जानकारी दी है। श्रेष्ठतम आवासीय, वाणिज्यिक, संस्थागत और सामाजिक बुनियादी ढांचे की सुविधा प्रदान करने के साथ-साथ ये दो आईएमसी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्रदान करके राज्य की सामाजिक-आर्थिक जनसांख्यिकी के उत्थान में प्रमुख भूमिका निभाएंगे। अनुमान है कि ये आईएमसी रु. 15,000 करोड़ से अधिक का निवेश आकृष्ट करेंगे और इनसे एक लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न होगा। नोडल एजेंसी के रूप में यूपीसीडा इन आईएमसी का विकास करेगी। इनके लिए बनाए जाने वाले विशेष उद्देश्य संगठन (एसपीवी) में भारत सरकार की इक्विटी हिस्सेदारी होगी और विश्वस्तरीय विकास के अवधारणात्मक निर्धारण के लिए वह अंतरराष्ट्रीय ख्याति के मास्टर प्लानर की नियुक्ति की जाएगी।
आगरा में प्रस्तावित आईएमसी लगभग 1,050 एकड़ में विस्तृत होगा। आगरा किले और ताजमहल से इसकी दूरी लगभग 20 किमी है। उधर, प्रयागराज में सरस्वती हाई टेक सिटी में प्रस्तावित आईएमसी का क्षेत्रफल 1,139 एकड़ है। यह प्रयागराज से 10 किमी की दूरी पर है।

क्लस्टरों का समग्र विकास सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने इन दोनों आईएमसी की संकल्पना एकीकृत टाउनशिप परियोजनाओं के रूप में की है। यहां के लिए प्रस्तावित बुनियादी ढांचे में सड़क नेटवर्क, जल निकासी, जलापूर्ति, सीवरेज, भूमिगत केबल द्वारा विद्युत आपूर्ति, भूमिगत डक्ट और कमांड सेंटर के साथ सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी की उपलब्धता शामिल हैं। नोडल एजेंसी के रूप में यूपीसीडा ने स्मार्ट शहरों में अपनाई गई विश्वस्तरीय सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुसार इन आईएमसी को विकसित करने की परिकल्पना की है।
उल्लेखनीय है कि अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारे (एकेआईसी) की कुल लंबाई 1,839 किलोमीटर है। कुल सात राज्यों से गुजरने वाले इस गलियारे का लगभग 57% भाग उत्तर प्रदेश में पड़ता है। एकेआईसी का लक्ष्य अपने संरेखण के इर्द-गिर्द सभी सात राज्यों में औद्योगिक क्लस्टरों का विस्तार करना है। योजना के अंतर्गत सभी राज्यों में एक-एक आईएमसी स्थापित किया जाना है। केवल उत्तर प्रदेश में ही दो आईएमसी होंगे।
इन आईएमसी का विकास, राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा कार्यक्रम के हिस्से के रूप में, औद्योगिक कॉरिडोर परियोजनाओं के उद्देश्यों के अनुरूप है। राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा कार्यक्रम का लक्ष्य भारत में ग्रीनफील्ड औद्योगिक शहरों का विकास करना है ताकि वे दुनिया में सर्वश्रेष्ठ विनिर्माण और निवेश स्थलों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें।
ध्यान देने योग्य है कि कानपुर के निकट भाऊपुर में चिह्नित स्थल पर आईएमसी की स्थापना का पूर्व प्रस्ताव भारत सरकार के अनुमोदन के लिए लंबित था। यूपीसीडा की ओर से निरंतर प्रयास किए जाने के बाद इस प्रस्ताव को आगरा में ग्रीनफील्ड साइट से प्रतिस्थापित करते हुए रिकॉर्ड समय में अनुमोदित किया गया।
यह सफलता, संगठित औद्योगीकरण में यूपीसीडा की सफलता की कहानी को प्रतिध्वनित करती है और उत्तर प्रदेश को समग्र विकास में अग्रणी के रूप में स्थापित करती है।


Scroll To Top
Translate »