वीसी जी देखिए, एलडीए में सुपरवाइजर व राजमिस्त्री मानचित्र सेल में बने बाबू , पास कर रहे हैं नक्शे


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लखनऊ । क्या लखनऊ विकास प्राधिकरण का सिस्टम चरमरा गया है ? अधिकारियों को नियम कानून नहीं दिखता है , या सेटिंग के चलते वह अपनी आंखें बंद किए हुए हैं ? सारे नियम कानून क्या आम जनता पर ही लागू होते हैं अपने अधिकारियों व कमियों को पूरी छूट दिए हुए हैं ।

ताजा मामला एलडीए के मानचित्र सेल से तैनात सुपरवाइजर अजय कश्यप और राजमिस्त्री आदिल का है जो बाबू बन कर मानचित्र सेल में काम कर रहे हैं । अजय कश्यप, पिछले दस बारह सालों से मानचित्र सेल में ही काम कर रहा है । बीच में एक साल वह बाहर रहा अब पुनः सारा काम देख रहा है । जबकि अजय कश्यप  की  मूल तैनाती मेंटीनेंस विभाग में है ।

इसी तरह आदिल , एलडीए में राजमिस्त्री के पद पर तैनात हैं पर वह भी बाबू बन कर मानचित्र सेल का काम देख रहा है । कुछ समय पहले मानचित्र सेल की एक फाईल गायब करने के मामले में आदिल को वीसी ने निलंबित कर दिया था । कुछ महीनों बाद ही वह बहाल हो कर वापस पुनः मानचित्र सेल में आने में सफल हो गया ।

ऐसा नहीं है कि अजय कश्यप व आदिल के बारे में जेई, एई, और अधिशासी अभियंता को जानकारी नहीं है कि वह मूलरुप से सुपरवाइजर व राजमिस्त्री है फिर भी वह बाबू बन कर काम कर रहे हैं कैसे ?सवाल यह है कि एलडीए में क्या बाबुओ कि कमी हो गई है जो अभियंता इन दोनों से मानचित्र सेल का महत्वपूर्ण काम ले रहे हैं , जबकि यह दोनों ही कर्मचारी कई तरह के आरोपों में पहले से ही फंस हुए हैं । बिल्डरों के साथ इनका पुराना रैकेट चल रहा है ।

वैसे तो यह एलडीए के दो छोटे कर्मचारियों का मामला है , लेकिन यह एलडीए की वर्तमान व्यवस्था को दिखता है कि जिस विभाग के मंत्री सीएम योगी स्वयं हो वहां के उच्च अधिकारी कैसे आंखे बंद कर बैठे हुए हैं । रोज एक मकान की उम्मीद में आने वाली जनता को तरह तरह के नियम बता कर सालों चक्कर लगवाया जाता है । और जहां खुलेआम नियम विरुद्ध ढंग से एक सुपरवाइजर व राजमिस्त्री मानचित्र सेल में काम कर रहे हैं वह नीचे से लेकर वीसी पी एन सिंह को  दिखाई नहीं पड रहा है ?

सवाल यह भी है कि यह दोनों कर्मचारी अपने अभियंता को इतने प्यारे क्यों है कि सब कुछ जानने के बाद भी वह इन पर हाथ रखे हुए हैं ? कल अगर मानचित्र सेल की फाईलों में कोई गड़बड़ी होती है या खो जाती है तो कौन जिम्मेदार होगा ? सुपरवाइजर व राजमिस्त्री तो बाबू का काम देख ही नहीं सकते हैं ?

यहां पर एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि मानचित्र सेल में बाबू बने अजय कश्यप व आदिल से वहां काम करने वाले एक दर्जन अभियंताओं का रोज फाईलों के लिए आमना सामना होता है उसके बाद भी किसी ने यह जानकारी एलडीए के उचच अधिकारियों को देना जरूरी नहीं समझी कि एक सुपरवाइजर व राजमिस्त्री गलत ढंग से मानचित्र सेल का काम कर रहे हैं । सब कुछ जानने के बाद भी चुप रहना इन अभियंताओं को भी कही ना कही दोषी के कटघरे में खड़ा करता है ?

किसी भी विभाग के मुखिया के हाथ पैर और आंखें, उसके नीचे काम करने वाले अधिकारी व कर्मचारी होते हैं जिनके भरोसे मुखिया पूरा विभाग चलाता है , लेकिन जब यही हाथ, पैर, और आंखें , धोखा दे जाये तो क्या हो ? ऐसा ही कुछ एलडीए वीसी पी एन सिंह के साथ भी हो रहा है तमाम सही जानकारियां अधिकारी उन तक नहीं पहुंचा रहे हैं ।

यह एक ऐसा ही मामला है , इस मे नीचे से ऊपर तक कार्रवाई होनी चाहिए जिन्होंने सब कुछ जानने के बाद भी मानचित्र सेल में एक सुपरवाइजर व राजमिस्त्री से काम लिया है ?
 


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