यशवंत सिन्हा का ऐलान, कहा-मेरा अब बीजेपी से सम्बंध नहीं


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पटना. पिछले कुछ महीनों से पार्टी में रहकर बागी तेवर अपनाने वाले बीजेपी के वरिष्ठ नेता ने शनिवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया. गैरबीजेपी नेताओं से सजे मंच से पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब उनका किसी भी पार्टी से कोई सम्बंध नहीं है. उन्होंने कहा कि आज देश में लोकतंत्र खतरे में है. वर्ष 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी के खिलाफ विपक्षी दलों की एकता की कवायदों को एक मंच देने के मकसद से शनिवार को पटना के एसकेएम हॉल में एक बैठक हुई. इस बैठक में गैरबीजेपी दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया. इसमें बीजेपी के वरिष्ट नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और शत्रुघन सिन्हा भी शामिल हुए. नोटबंदी और जीएसटी के अलावा किसानों व रोजगार के मसलों पर मोदी सरकार पर लगातार हमला बोल रहे पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा ने बीजेपी छोड़ने का ऐलान कर दिया.
बीते दिनों राष्ट्र मंच का गठन करने वाले यशवंत सिन्हा ने कहा कि वे आज बीजेपी छोड़ रहे हैं. वे बीजेपी के साथ सभी सम्बंधों को आज समाप्त कर रहे हैं. यशवंत सिन्हा ने किसी और पार्टी में शामिल होने की कयासों को भी विराम देते हुए कहा कि आज वे दलगत राजनीति से भी सन्यास ले रहे हैं. उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि वे जानबूझकर मित्रों नहीं कह रहे हैं. जब देश मुसीबत में था तो पटना ने रास्ता दिखाया था और आज भी देश को यह रास्ता दिखाएगा. बीते दिनों संसद के बजट सत्र के छोटा करने का बीजेपी पर साजिश रचने का आरोप भी लगाया. उन्होंने कहा कि गुजरात चुनाव की वजह से संसद का सत्र छोटा किया गया. जबकि देश में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. अटल बिहारी वाजपेई की सरकार में वित्तमंत्री रह चुके यशवंत सिन्हा ने कहा कि देश के हालात चिंताजनक हैं और यहां सभी नेता देेश के मौजूदा हालात पर विचार करने आए हैं.
मंच पर मौजूद बीजेपी के वरिष्ठ नेता शत्रुघन सिन्हा से चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि वे यहां से चुनाव लड़ने नहीं आए हैं वे घबराएं नहीं. उनका दिल देश के लिए धड़कता है. यशवंत सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का एक हिस्सा सड़ गया है, जिससे बदबू आ रही है. पटना के एसकेएम हॉल में यशवंत सिन्हा की ओर से गैरबीजेपी दलों का अधिवेशन आयोजित किया गया. इसमें बिहार के नेता प्रतिपक्ष व आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, बीजेपी के शत्रुघन सिन्हा, जेडीयू के शरद गुट के शरद यादव, उदय नारायण चौधरी के अलावा कांग्रेस, राजद, आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी सहित बीजेपी-जेडीयू के असंतुष्ट नेता शामिल हुए.
इस अधिवेशन के लिए निमंत्रण पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को भी भेजा गया था, लेकिन वे नहीं पहुंची. उनकी दिलचस्पी गैरकांग्रेसी-गैरबीजेपी वाले तीसरे मोर्चे में है. बहरहाल, मोदी सरकार के खिलाफ झंडा बुलंद करने वाले यशवंत सिन्हा की अगली रणनीति बगैर किसी दल में शामिल हुए विपक्षी एकता को मजबूत करना होगा. राष्ट्रीय मंच का गठन करने वाले यशवंत सिन्हा अब खुलकर विपक्षी दलों के समर्थन में उतर सकेंगे.


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