योगी कैबिनेट का फैसला, कानुपर, आगरा,और मेरठ में शुरू होगी मेट्रो


 

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लखनऊ:  प्रदेश सरकार ने कानपुर, आगरा और मेरठ शहरों में मेट्रो सेवाएं शुरू करने का बुधवार को फैसला किया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया.बैठक के बाद उत्तर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता एवं कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि आगरा, कानपुर और मेरठ में मेट्रो सेवा शुरू की जाएगी. उन्होंने कहा कि तीनों ही शहरों में मेट्रो के दो कॉरिडोर होंगे. आगरा मेट्रो की परियोजना लागत 13 हजार करोड़ रुपये आएगी और यह 30 किलोमीटर लंबाई वाली होगी.
सिंह ने बताया कि कानपुर मेट्रो में 30 किलोमीटर लंबाई के दो कॉरिडोर होंगे. इसकी परियोजना लागत 17 हजार करोड़ रुपये होगी. उन्होंने बताया कि मेरठ मेट्रो में 33 किलोमीटर लंबे दो कॉरिडोर होंगे और इसकी परियोजना लागत 13 हजार 800 करोड़ रुपये होगी.

हाल ही में योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कारपोरेशन बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. कैबिनेट ने बुधवार के एक अन्य फैसले में 24 जिलों में स्थायी लोक अदालतों के गठन को मंजूरी दी. सिंह ने बताया कि मंत्रिपरिषद ने सभी कत्लखाने शहर की सीमाओं से बाहर ले जाने का निर्णय भी किया.
उत्तर प्रदेश सरकार के हाल ही में 42 हजार सिपाहियों की भर्ती के विज्ञापन से खफा सैंकड़ों पूर्व अभ्यर्थियों ने बुधवार को लखनऊ में प्रदर्शन किया. इन अभ्यर्थियों ने पिछली प्रदेश सरकार द्वारा 2015 में निकाले गए 34716 सिपाही के पदों पर आवेदन किया था. इस पर राज्य सरकार के प्रवक्ता और स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने पत्रकारों को बताया कि सिपाहियों की नई भर्ती से पुरानी भर्ती वाले मामले से कोई संबंध नहीं है. वह मामला न्यायालय में विचाराधीन है, उसमें जो भी फैसला आयेगा उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी.
वर्ष 2015 सिपाही भर्ती के अभ्यर्थी बुधवार सुबह शहर के लक्ष्मण मेला मैदान पहुंचे. यहां उन्होंने प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. अभ्यर्थियों का कहना था कि 2015 के सिपाही भर्ती परिणाम पहले घोषित किए जाएं उसके बाद सरकार नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करे. आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का कहना था कि 2015 में निकाले गए 34716 पदों में 28916 पद पुरुष और 5800 पद महिला सिपाहियों के लिए थे. ये भर्तियां मेरिट के आधार पर होनी थीं. इस भर्ती प्रक्रिया का मामला उच्च न्यायालय पहुंच गया था. उच्च न्यायालय ने 27 मई 2016 को इस भर्ती परीक्षा के परिणाम पर रोक लगा दी थी.

एक दिन पहले प्रदेश सरकार ने 42 हजार नए सिपाहियों की भर्ती का विज्ञापन निकाला है, जिसके फार्म भरने की प्रक्रिया 22 जनवरी से शुरू होगी. इसको लेकर आज सैकड़ों की संख्या में पुलिस अभ्यर्थी अपना विरोध ज़ाहिर कर रहे थे जिस पर काबू पाने में पुलिस प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी. गौरतलब है कि पिछली सरकार ने दिसंबर 2015 को भर्ती बोर्ड ने 28,916 पुरुष और 5800 महिला सिपाहियों की भर्ती का विज्ञापन निकाला था.

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि कुछ लोगों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ भर्ती प्रक्रिया को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी. इसके बाद 27 मई 2016 में उच्च न्यायालय ने उस पर रोक लगा दी और सरकार की तरफ से सफल प्रयास ना होने पर अभी तक सिपाही भर्ती का परिणाम घोषित नहीं हुआ.
इस मामले में उप्र सरकार के प्रवक्ता और स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि 34,716 भर्तियों का मामला अदालत में चल रहा है. ये नियुक्तियां पहले की सरकार में निकली थी, जो मामला अदालत में विचाराधीन है. हम अब नई भर्ती प्रक्रिया लाए है वो अलग है, उसका इस पुरानी भर्ती वाले मामले से कोई लेना देना नहीं है. उनसे पूछा गया कि अगर पुराने अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला दे दिया गया तो सरकार क्या कदम उठायेगी, इस पर उन्होंने कहा कि प्रदेश में सिपाही के एक लाख से अधिक पद सिपाहियों के पद खाली है, इस लिये कोई फर्क नहीं पड़ेगा.


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