सपा सरकार का 17 पिछड़ी जातियों को एससी में शामिल करना हवाई चुनावी हथकण्डाःमायावती


75809d19e5143f6aee656483e7e39988_m

लखनऊ।बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कहा कि प्रदेश की समाजवादी पार्टी (सपा) की सरकार द्वारा 17 जातियों को ओ.बी.सी. वर्ग से निकालकर अनुसूचित जाति (एस.सी.) वर्ग की सूची में शामिल करने का जो निर्णय लिया गया है वह केवल इन वर्गों के लोगों की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास है। उन्होंने सपा सरकार पर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओ.बी.सी.) की एक विशेष जाति यादव समाज को छोड़कर सभी अन्य पिछड़ी जातियों की घोर उपेक्षा और अनदेखी करते रहने का आरोप लगाया।

मायावती ने कहा कि अब प्रदेश में विधानसभा आमचुनाव से ठीक पहले उन्हें उसी प्रकार से गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है जिस प्रकार वर्ष 2005 में उन्हें गुमराह करने का असफल प्रयास पिछली सपा सरकार द्वारा किया गया था। बसपा मुखिया ने कहा कि यह केवल खोखला व हवाई चुनावी हथकण्डा है और इसके सिवाय कुछ भी नहीं है। इस प्रकार के छलावे से ओ.बी.सी. लोग वैसे ही गुमराह होने वाले नहीं हैं जैसा कि वह वर्ष 2007 में विधानसभा के आमचुनाव में नहीं होकर बसपा के साथ ही रहे थे। बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने गुरूवार को अपने बयान में कहा कि सपा सरकार के इस फैसले से इन वर्गों का फायदा नहीं बल्कि नुकसान ही होने वाला है क्योंकि तब वह अपने ओ.बी.सी. वर्ग के तहत् मिलने वाली आरक्षण की सुविधा से भी वंचित हो जायेंगे, जैसा कि सन् 2005 के अन्त में तब मुलायम सिंह यादव की सरकार के फलस्वरूप हुआ था। उन्होंने कहा कि कानूनी तौर से यह फैसला एकतरफा है और ग़लत है क्योंकि अनुसूचित जाति की सूची में किसी भी जाति को शामिल करने या हटाने का अधिकार किसी राज्य की विधानसभा या राज्य सरकार के पास नहीं। इसी कारण मुलायम सिंह यादव ने अक्टूबर 2005 में जब ओ.बी.सी. की 17 जातियों को एस.सी. की सूची में शामिल करने का फैसला लिया था तो तब ऐसी जातियां फिर न एस.सी. में शामिल हो पायीं थीं और न ही उनका नाम ओ.बी.सी. सूची में रह पाया था, जिस कारण वह आरक्षण की सुविधा से वांचित हो गयी थी।

मायावती ने कहा कि बाद में बी.एस.पी. की सरकार बनने पर इन 17 जातियों के साथ न्याय करते हुये इनकी आरक्षण की सुविधा को बहाल करने के साथ-साथ इन जातियों को एस.सी. का कोटा बढ़ाने की शर्त के साथ एस.सी. की सूची में शामिल करने का प्रस्ताव केन्द्र सरकार के पास भेजा गया था, जो कि अभी भी लम्बित पड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि इस मामले में प्रदेश की सपा सरकार ने अपने शासनकाल के दौरान् एक बार भी केन्द्र सरकार पर दबाव नहीं बनाया और इसे नजरअन्दाज किये रही, लेकिन अब चुनाव के समय समाज को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है, यह दुःखद और निन्दनीय भी है।


Scroll To Top
Translate »