लखनऊ नगर निगम मे अधिकारियाें व कर्मचारियों के रिश्तेदार संस्थायें संचालित कर व ठेका पटटी कर जम कर रहे है लूट


 

1c6a821557602_532921020383937_4221984316261357704_n

 

लखनऊ।  लखनऊ नगर निगम मे परिवारवाद जम कर फल फूल रहा है यहां पर कई अधिकारियाें व कर्मचारियों के सगे नाते, व रिश्तेदार संस्थायें व ठेका पटटी कर जम कर लूट मचाये हुए है . दिलचस्प बात ताे यह है कि ऐसे लाेगाें काे नगर आयुक्त उदय राज सिंह का संऱझण मिला हुअा है .

विगत 4 वर्ष पूर्व स्वास्थ्य विभाग से हटे द्वितीय  श्रेणी लिपिक सत्यव्रत यादव को पुनः तैनात कर कार्यदायी संस्था के पटल का काम सौंप दिया है। जबकि उक्त लिपिक के परिजन निगम में दो संस्थाओं का संचालन करते हैं। और इनको भुगतान आदि का कार्य सत्यव्रत यादव ही कर रहे हैं। सूत्र बताते है कि मृतक आश्रित कोटे में लिपिक की नौकरी करने वाले सत्यव्रत यादव के परिजन स्वास्थय विभाग में ही आरना  एसोसिएट व राय श्री नामक संस्थाएं चला रहे हैं। निगम के अधिकारी और कर्मचारी मिलकर कागजों पर कुछ और धरातल पर कुछ और दिखाकर लाखों का चूना  प्रति माह लगा रहे है | नीचे से ऊपर तक चल रहे कमीशन बाजी के खेल में सभी मालामाल हो रहे है |

स्वास्थय विभाग में कुल 26 संस्थाएं पंजीकृत हैं। पूर्व नगर आयुक्त ने इस लिपिक पर लगे आरोपों एवं शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उसे विभाग से हटाकर पटल का छीन लिया था।लेकिन इस दागी बाबू को वर्तमान नगर आयुक्त ने पुनः तैनाती देकर पटल का कार्य भी वर्षों पहले ही सौंप दिया था। कहा जाता है कि इस लिपिक ने रुतबे और पैसे के बल पर फिर अपनी कुर्सी हथिया ली। नींचे से ऊपर तक सबको खुश रखने में माहिर इस लिपिक का एक भी बिल लेखाधिकारी भुगतान के लिए नहीं रोकते। खाता न सही स्वास्थ्य विभाग में जो सत्यव्रत कहें वही सही।

स्वास्थ्य विभाग में मैनपॉवर सप्लाई करने वाली 26 संस्थाओं में दो संस्थाएं आरना  एसोसिएट व राय श्री सत्यव्रत के परिवार के लोग संचालित कर रहे हैं। जबकि निगम में तैनात किसी भी अधिकारी व कर्मचारी के परिजन ठेके अथवा पट्टे का काम नहीं कर सकते। इसका बाकायदा शासनादेश भी है। निगम के अधिकारी भी जानते है कि सत्यव्रत यादव परिजनों के नाम से निगम में संस्थाएं चला रहे हैं। जिसके विरूद्ध कार्यवाही करने के बजाय लिपिक को ही अफसर संरक्षण दे रहे है।

 

सूत्र बताते है कि यह बाबू इतना माहिर है कि उसका हर काम डंके की चोट पर बेरोक-टोक होता है।यही वजह है कि सदन की स्वीकृति के बाद पार्षदों को दिए गए कर्मचारी कागजों पर दिखाकर उनका भुगतान किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के क्षेत्र में कर्मचारी लगाए गए।लेकिन सबको खुश रखने वाले इस लिपिक ने पार्षदों को भी खुश कर उनसे प्रमाण पत्र ले लिया और अब उन संस्थाओं को भुगतान भी किया जा रहा है।बताते है कि कई वार्डों का भुगतान हो गया है और कई वार्डों के कथित कर्मचारियों की पगार की प्रक्रिया जारी है।

यह भी बताया जाता है कि इसी तरह दर्जन भर से अधिक संस्थाएं ऐसी हैं जिनका संचालन नगर निगम में कार्यरत लोगों के परिजन कर रहे हैं। इसी तरह उद्यान विभाग में प्रभारी के पद पर कार्यरत गंगाराम गौतम के भाई अनिकेत के नाम से फ्लोरा हाईटेक एवं नारायण इंटरप्राइजेज निगम में कार्यदायी संस्था चलाने की चर्चा है। यही तैनात द्वितीय  श्रेणी के लिपिक उपेन्द्र यादव अपने भाई विकास यादव के नाम से माँ इंटर प्राइजेज नाम की कार्यदाई संस्था संचालित कर  रहे है |

 

बहरहाल नगर निगम में अधिकारी और कर्मचारी का गठजोड़ कार्यदायी संस्थाए चला रहा है | निगम प्रशासन सब कुछ जानते हुए स्वहित में मौन है | नगर निगम लखनऊ में भ्रष्टाचार से जुड़े मामले परत दर परत खुल रहे हैं । अब देखना यह है कि योगी सरकार यदि वास्तव में भ्रष्टाचार के खिलाफ है और साफ़ सुथरी एवं पारदर्शी व्यवस्था जनता को देने के लिए संकल्पबद्ध है तो सरकार को चाहिए कि वो इन मामलों की शासन स्तर से जांच कराकर निगम को लूट रहे विभागीय ‘काकस’ का पर्दाफ़ाश कर दोषी लोगों को दण्डित करे।


Scroll To Top
Translate »