सियासी दिग्गजों ने खाई मोदी को हराने की कसम


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बंगलुरू. जेडीएस के एचडी कुमारस्वामी ने बुधवार शाम को कर्नाटक के सीएम और कांग्रेस के जी परमेश्वर ने डिप्टी सीएम पद शपथ ली. बीजेपी को मात देने वाले इस कांग्रेसी दांव से जगी गैरकांग्रेसी दलों के मोदी को मात देने की उम्मीद से भी यह शपथ समारोह जगमगाता नजर आया. मंच पर यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का चेहरा खिलखिला रहा था तो एक-दूसरे का हाथ थामे गैरबीजेपी दलों के दिग्गजों को भी एकता में शक्ति का एक नया विश्वास उत्साहित कर रहा था. वैसे तो यह खालिस एक प्रदेश का औपचारिक शपथ समारोह था, लेकिन इसके मायने भारतीय राजनीति के दूरगामी नतीजों की ओर इशारा कर रहा था. उन नतीजों की जो कर्नाटक के विधानसभा चुनाव के बाद विपक्षी दलों के नेताओं में जागे आत्मविश्वास की झलक पेश करने वाला था.
कांग्रेस ने जिस तरह से बगैर देर किए बीजेपी को कर्नाटक की सत्ता पर काबिज होने का दांव चला तो उसमें उलझी बीजेपी के हाथों से सत्ता फिसलकर कांग्रेस और जेडीएस की झोली में आ पहुंची. मोदी और अमित शाह की सियासी चालों के आगे लगातार लाचार नजर आ रही कांग्रेेस ने जब कर्नाटक की बाजी मारी तो देश की सियासत का चेहरा ही बदल गया. कांग्रेस ने दूसरी पार्टी होने के बावजूद 38 सीटों वाली जेडीएस को सरकार की अगुवाई का फैसला लिया तो जेडीएस ही नहीं तमाम राज्यों के क्षेत्रीय दलों में भी एक सकारात्मक मैसेज गया. वह मैसेज कि कांग्रेस बीजेपी को रोकने के लिए हर कदम उठाने को तैयार है. दूसरे नंबर की पार्टी होने के बावजूद जेडीएस को सपोर्ट कर उसने विपक्षी दलों को यह भी संदेश दे दिया कि मौजूदा समय में व्यक्तिगत की बजाए सामूहिक प्रयास करने की ज्यादा जरूरत है और इसके लिए सत्ता की ललक भी आड़े नहीं आनी चाहिए.
बहरहाल, कांग्रेस का यह संदेश गैरबीजेपी दलों के बीच बखूबी पहुंचा और कर्नाटक में बीजेपी के मात खाने के साथ ही विपक्षी दलों को भी एक उम्मीद नजर आने लगी. कांग्रेस ने इन उम्मीदों को रोशन करने के लिए कुमारस्वामी के शपथ समारोह में शरीक होने का न्योता भी भिजवाया. वर्ष 2019 में बीजेपी के खिलाफ मोर्चे की उम्मीद से भरे तमाम सियासी दिग्गज कर्नाटक पहुंचे. महाराष्ट्र से एनसीपी प्रमुख शरद पवार थे तो बीजेपी के लंबे अरसे तक सहयोगी रहे आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू भी शपथ समारोह में शामिल होने पहुंचे. मोदी के खिलाफ मोर्चा खोलने वाली पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी वहां थीं तो बीजेपी को ललकारने वाले दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल भी कुमारस्वामी के बुलावे पर बंगलुरू पहुंचे. कर्नाटक में जेडीएस की सहयोगी और उत्तर प्रदेश में अखिलेश से गठबंधन कर उपचुनाव में बीजेपी को मात देने वाली मायावती और समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव तो बिहार आरजेडी नेता तेजस्वी यादव भी वहां नजर आए.
वहीं तमिलनाडु की सियासत में कदम रखने वाले अभिनेता कमल हासन भी इस समारोह में पहुंचे. सांप्रदायिकता विरोधी राजनीति की धुरी रहने वाली लेफ्ट के सीताराम येचुरी और रालोद सुप्रीमो अजित सिंह भी शपथ समारोह का हिस्सा बने. सभी के चेहरे कर्नाटक में सजे इस मंच को लेकर खिले हुए थे. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मंच पर सभी दिग्गजों से हाथ मिला रहे थे तो यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी सभी दलों को साथ लेकर चलने को लेकर अपनी शालीनता से उम्मीद जगा रही थीं. मंच पर इन सियासी दिग्गजों ने एक—दूसरे का हाथ थामकर वर्ष 2019 लोकसभा चुनाव में भी मंच साझा करने का ऐलान करने का इशारा कर दिया.
13 राज्यों के 15 दलों के ये दिग्गज साफ मैसेज दे रहे थे वे सिर्फ इसी मंच पर एक नहीं है, बल्कि वर्ष 2019 लोकसभा चुनाव में वे मोदी को रोकने के लिए भी मंच साझा करने को तैयार हैं. हालांकि तीसरे मोर्चे की पहल करने वाले के चंद्रशेखर राव, तमिलनाडु से करुणानिधि के बेटे एमके स्टालिन को भी पहुंचना था. लेकिन, ये तीनों यहां नहीं पहुंचे. पुलिस फायरिंग की घटना के बाद तूतीकोरिन जाने की वजह से एमके स्टालिन यहां नहीं पहुंचे.


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