आय 1822.00 करोड़ रुपए होने की जानकारी दी है लेकिन आमदनी 1616.00करोड रूपये ही हुई है
मामले का खुलासा मंडी परिषद के वित्त नियंत्रक के पत्र के बाद हुआ
लखनऊ । यूपी मंडी परिषद के अधिकारी इस वित्तीय वर्ष मे अपनी आय के गलत आंकड़े मुख्यमंत्री योगी को बता कर उनको भी गुमराह करने से बाज नहीं आये है । वर्ष 2018–19,मे मंडी परिषद ने अपनी आय 1822.00 करोड़ रुपए होने की मुख्यमंत्री व शासन को जानकारी दी है लेकिन आमदनी 1616.00करोड रूपये ही हुई है । इतनी ही धनराशि मंडी समितियों द्वारा बैक खाते में जमा कराई गई है ।
इस सनसनीखेज मामले का खुलासा मंडी परिषद के वित्त नियंत्रक के पत्र के बाद हुआ है इसके बाद मंडी परिषद मे इस मामले पर लीपापोती कर दबाने की कोशिश की जा रही है ।
मंडी परिषद के निदेशक जेपी सिंह ने अपने निदेशक बनने के कुछ दिनों बाद ही मुख्यमंत्री योगी को मंडी परिषद की आमदनी में बडी बढ़ोतरी होने की बात बताते हुए इसे बढ कर इस वित्तीय वर्ष में 1822.00 करोड़ रुपए होना बताया था । इसके कुछ समय बाद ही मंडी परिषद के वित्त नियंत्रक ने अपने पत्र संख्या लेखा/संपेक्षा (1)/2019-1429 दिनांक 24-10-2019 , समस्त सम्माननीय उपनिदेशको को लिखा तो इस सनसनीखेज मामले का खुलासा हुआ ।

वित्त नियंत्रक ने अपने पत्र मे स्पष्ट किया है कि अवगत कराना है कि समस्त मंडी समितियों की इनपुट के अनुसार कुल आय रूपए 1822.00 करोड़ है जबकि उक्त वित्तीय वर्ष मे बैक मे शुद्ध रूप मे जमा धनराशि रूपये 1616.00 करोड़ है । इस प्रकार मंडी समितियों द्वारा इनपुट मे दशायी गयी धनराशि मे रूपए 206.00 करोड़ कम धनराशि बैंकों में जमा हुई है ।
इस सम्बन्ध में संज्ञान मे लाया गया है कि सरकारी क्रय एजेंसियों द्वारा सुख- सुविधा आदि मदो मे मंडी समिति द्वारा भुगतान की जाने वाली धनराशि को मंडी शुल्क एवं विकास सेस शुल्क की धनराशि से कटौती करके अवशेष धनराशि का भुगतान किया गया है । इसके अतिरिक्त इसमें वह धनराशि भी सम्मिलित हैं जिसके चेक 31, मार्च 2019, तक असंग्रहीत , अनादत, अवस्था मे थे ।
मंडी समितियों से 206, करोड़ रुपए की इस कमी को पूरा करने के लिए कहा गया है तो उन्होंने हाथ खड़े कर दिए हैं ।
बरहाल ,इस मामले पर मंडी परिषद मे दबाने के लिए पूरी कोशिशें की जा रही है ।
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