ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस तथा ईज़ ऑफ़ लिविंग में सुधार हेतु UP में 675 विनियामक अनुपालनों को कम करने हेतु चिन्हित किया गया


  • उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) और इन्वेस्ट यूपी ने विनियामक अनुपालनों के भार को कम करने पर एक-दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया
  • ‘गवर्नमेंट-टू-बिजनेस’ के अतिरिक्त अब ईज़ ऑफ़ लिविंग में सुधार हेतु गवर्नमेंट-टू-सिटिजन’ अनुपालनों को भी किया गया सम्मिलित
  • राज्य सरकार ने पहले चरण में 195 अनुपालन और दूसरे चरण में 480 अनुपालनों को कम करने का तय किया लक्ष्य 
  • अनुपालनों के भार को कम करने की कार्य योजना के अनुश्रवण के लिए विकसित किया गया पोर्टल
  • अनुपालन को कम करने के लिए उद्योग संघों के सुझावों पर भी विचार किया जाएगा
  • राज्य सरकार ने इस कार्यक्रम के तहत प्रगति की निगरानी के लिए इन्वेस्ट यूपी स्तर पर एक टास्क फोर्स का किया है गठन 

लखनऊ | बिज़नेस रिफाम्र्स एकशन प्लान के कार्यान्वयन में राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान प्राप्त करके ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में अभूतपूर्व प्रगति के उपरान्त उत्तर प्रदेश सरकार ने अब न केवल व्यवसायों बल्कि नागरिक-केंद्रित सेवाओं पर भी विनियामक अनुपालनों के भार (रेग्यूलेटरी कम्पलयंस बर्डन) को कम करने के लिए कार्यवाही तेज कर दी है।इस संबंध में उद्योग संवधन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी), भारत सरकार ने राज्य की निवेश प्रोत्साहन एजेंसी-‘इन्वेस्ट यूपी’ के सहयोग से आज यहां योजना भवन में ‘विनियामक अनुपालन भार को कम करने’ के विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सभी राज्यों में परिभाषित अनुपालन मापदंडों, जैसे- नवीनीकरण, निरीक्षण, पंजीकरण और रिकॉर्ड, डिस्प्ले की आवश्यकता, रिटर्न फाइल करने, निरपराधीकरण और निरर्थकता आदि पर आधारित विनियामक अनुपालनों के भार को कम करना है तथा फिजिकल टचपॉइंट्स को कम करते हुए इन अप्रासंगिक कानूनों व नियमों को समाप्त करने, विलय करने अथवा संख्या कम करना है।

राज्य सरकार के 40 विभागों के नोडल और उप-नोडल अधिकारियों ने इस कार्यशाला में भाग लिया। उत्तर प्रदेश सरकार ने अब तक कुल 675 अनुपालनों कम किए जाने हेतु चिन्हित किया है, जिसमें से 195 अनुपालन प्रथम चरण में और 480 अनुपालन दूसरे चरण में कम किए जाने हैं।इस अवसर पर विभिन्न विभागों के लगभग 80 अधिकारियों को संबोधित करते हुए अपर मुख्य सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास, श्री अरविंद कुमार ने कहा कि उद्योगों व उद्यमों के लिए व्यवसाय में सुगमता में सुधार के अतिरिक्त अब सरकार नागरिक-केंद्रित सेवाओं और अनुपालनों पर ध्यान केंद्रित कर रही है ताकि ‘जीवनयापन में सुगमता’ (ईज आॅफ लिविंग) में सुधार हो सके।

श्री अरविन्द कुमार ने विभागों से युद्धस्तर पर इस कार्यक्रम पर कार्यवाही करने का आह्वान किया क्योंकि उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक अनुपालन वाले राज्यों में से एक के रूप में चिन्हित किया गया है।डीपीआईआईटी का प्रतिनिधित्व करते हुए इन्वेस्ट इण्डिया के अधिकारियों ने बताया कि राज्यों और उनके विभागों के लिए एक समर्पित पोर्टल शुरू किया गया है ताकि उन अनुपालनों को चिन्हित और अपलोड किया जा सके जिन्हें कम किया जा सकता है। इस पोर्टल में मुख्य सचिव के लिए प्रत्यक्ष समीक्षा और निगरानी के लिए डैश बोर्ड होगा। कम किए जाने वाले अनुपालनों को चिन्हित करने के तकनीकी पहलुओं और प्रक्रिया को नोडल अधिकारियों को विस्तार से बताया गया।

सचिव, औद्योगिक विकास तथा मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ), इन्वेस्ट यूपी, श्रीमती नीना शर्मा ने बताया कि इन्वेस्ट यूपी द्वारा 26 विभागों से संबंधित लगभग 120 अनुपालनों को पहले ही पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है, किन्तु अब विभागीय नोडल अधिकारियों को इस कार्य को करने के लिए यूजर आईडी और पासवर्ड प्रदान किए जाएंगे।सूचित किया गया कि इस कार्यक्रम को दो चरणों में विभाजित किया गया है, पहला चरण 31 मार्च, 2021 को समाप्त होगा और दूसरा चरण 15 अगस्त, 2021 तक होगा। प्रत्येक विभाग को ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस तथा ईज़ ऑफ़  लिविंग से संबंधित अनुपालनों को चिन्हित करने और कम करने के लिए कार्य योजना प्रस्तुत करनी होगी, तदोपरान्त साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे।उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम के निष्पादन और समन्वय के लिए राष्ट्रीय स्तर पर डीपीआईआईटी को नोडल विभाग के रूप में नामित किया गया है।

विशेष सचिव, औद्योगिक विकास एवं अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (एसीईओ), इन्वेस्ट यूपी, डॉ. मुथुकुमारसामी बी ने बताया कि इस प्रयोजन हेतु राज्य सरकार ने पहले ही सीईओ, इन्वेस्ट यूपी की अध्यक्षता में एक कार्यबल का गठन कर दिया है, जिसमें विशेष सचिव, विधायी, विशेष सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई), प्रबंध निदेशक, पिकप सदस्य और एसीईओ, इन्वेस्ट यूपी सदस्य सचिव हैं।आज आयोजित की गई कार्यशाला में न्याय, बांट-माप, आवास एवं शहरी नियोजन, नगर विकास, आबकारी, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, पर्यटन, ऊर्जा, सूचना एवं जनसंपर्क, गृह, श्रम, सहकारी, मत्स्य पालन, उच्च शिक्षा, राजस्व, समाज कल्याण, चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण, सिंचाई आदि विभागों के तकनीकी विशेषज्ञों के साथ नोडल अधिकारियों ने भाग लिया।———–


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