
लखनऊ। यमुना प्राधिकरण में मुआवजा पाने के लिए 89 किसान पिछले आठ महीने से भटकते रहे, आफिस के चक्कर लगाते रहे पर अधिकारियों ने किसानों के दुःख को समझा ही नहीं। अब सीईओ अरूण वीर सिंह को पता चला तो उन्होंने लेखपाल, कानूनगो, नायब तहसीलदार, तहसीलदार और ओएसडी के खिलाफ चार्जशीट तैयार कर कार्रवाई करने का आदेश एसीईओ को दिया है।
यमुना अथाॅरिटी एरिया में आने वाले सेक्टरों के इंटरनल डिवलेपमेंट करने के लिए यमुना अथाॅरिटी किसानों से जमीन खरीद रही है। धनौरी गांव में सेक्टर-16 का विकास कार्य चल रहा है। इसके लिए यमुना अथाॅरिटी किसानों को एक्सटा मुआवजा बांटने के लिए एक अगस्त 2022 को फाईल तैयार कर ली थी। इस तरह भटटा गांव में भी 100 मीटर रोड बनाने के लिए किसानों को एक्स्ट्रा मुआवजा बांटने के लिए दो महीने पहले फाईल तैयार कर ली थी। लेकिन किसानों का आरोप है कि यमुना अथाॅरिटी के भूलेख विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों ने 8 महीनें बीत जाने के बाद भी किसानों को एक्स्ट्रा मुआवजा नहीं बाटा। जिससे यमुना अथाॅरिटी के सेक्टर-16 और 100 मीटर रोड का काम बंद पड़ा हुआ है।
गुरूवार को किसान अपने मुआवजे से संबंधि तमाम मामलों को लेकर सीईओ डाॅ.अरूणवीर सिंह से मिले। किसानों ने सीईओ को पूरे मामले से अवगत कराते हुए बताया कि 8 महीनें पहले उनको एक्स्ट्रा मुआवजा बांटने के लिए फाइल तैयार होकर भूलेख विभाग में अधिकारियों के पास पड़ी हुई धूल फांक रही है। किसान लगातार 8 महीनेंसे एक्स्ट्रा मुआवजा बांटने के लिए यमुना अथाॅरिटी दफतर में अधिकारियों के चक्कर लगा रहे है। आरोप है कि 89 किसान हर रोज आते और भूलेख के अधिकारी बहाना बनाकर टाल देते। किसानों की बात सुन कर सीईओ ने फाइल को मगाकर देखा तो दंग रह गए है। पूरी फाइल मुआवजा बांटने के लिए तैयार रखी थी।
इस पर संज्ञान लेते हुए सीईओ ने एसीईओ मोनिका रानी को धनौरी और भटटा गांव के मामलों की जांच कर दोनों गांवों की मुआवजे से संबंधित फाइलों को देख रहे लेखपाल ,कानूनगो, नायब तहसीलदार, तहसीलदार और ओएसडी के खिलाफ जांच कर चार्जषीट तैयार कर कठोर कार्रवाई करने के लिए राजस्व विभाग को भेजे। जिससे की लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो सके।
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