आपने अपने जीवनकाल में शराफत और इंसानियत के ढोल पीट-पीटकर क्या अर्जित कर लिया? बल्कि समाज ने हमेशा आपको अपमान की दृष्टि से ही देखा और आप खामोश होकर सब कुछ सहते रहे। समाज ने सही ढंग से आपको शरीफ इंसान भी नही बनने दिया। मैं अगर इस सनसनीखेज दौर में शरीफ बदमाश बनना चाहता हूूं, तो इसमे आपको आपत्ति क्यों हो रही है…..
आसिम अनमोल
बाप की रोज़ाना की नसीहतों और बक-बक ने तंग आकर एक रोज़ अपने बेटे से पूछ लिया आखिर तेरा पढ़ाई में मन क्यों नही लगता ? आखिर तू बनना क्या चाहता है ? बेटे ने पहले पिता की ओर देखा और खुद को तैयार करते हुए बड़े गर्व से कहा की मैं शरीफ बदमाश बनना चाहता हूं ?
हैरतअंगेज जबाब सुनते हुए पिता ने डपट लगाते हुए कहा, बेवकूफ यह शरीफ बदमाश कौन-सा पद होता है? जिसके लिए तू इतना उत्साहित होकर तैयारी करना चाहता है। बेटे ने पिता से कहा, ये औरों से कहीं ज्यादा बड़ा और सम्मानजनक पद उभरकर सामने आया है।
आपने अपने जीवनकाल में शराफत और इंसानियत के ढोल पीट-पीटकर क्या अर्जित कर लिया? बल्कि समाज ने हमेशा आपको अपमान की दृष्टि से ही देखा और आप खामोश होकर सब कुछ सहते रहे। समाज ने सही ढंग से आपको शरीफ इंसान भी नही बनने दिया। मैं अगर इस सनसनीखेज दौर में शरीफ बदमाश बनना चाहता हूूं, तो इसमे आपको आपत्ति क्यों हो रही है ?
पिता ने कहा, मुझे एतराज़ तुझसे नहीं तेरे इस शरीफ बदमाश से है, जो भूत की तरह तेरे ऊपर सवार है। बेटे ने बड़ी विनम्रता से कहा, पिता जी हमारे समाज में सैकड़ों शरीफ बदमाश अपना जीवन-यापन कर रहे हैं, अगर उसमे एक शरीफ बदमाश और बढ़ जाएगा तो इसमे किसी को क्या नुकसान है ?
शरीफ बदमाश कोई लाठी-डंडे थोड़े ही चलाता है, जो किसी का खून-खच्चर हो जाएगा या समाज को कोई नुक्सान पहुंचेगा। शरीफ बदमाश तो दिमागी चालें चलता है। जो आम शरीफ इंसान की सोच से परे होती हैं।
हम भी ऐसी प्लानिंग करेंगे। साजिशें रचेंगे। कम से कम समाज में हमारा रुआब तो होगा। जिधर नज़र उठाएंगे उधर डर से ही सही फ़र्ज़ी सलाम तो आंएगे। प्रजा टाइप के लोग आगे-पीछे घूमेंगे। आम शरीफ पडोसी को हिकारत की नज़रों से देखने का शौक भी पूरा हो जाएगा।
पिता जी देर तक सुनने के बाद पुनः फिर भड़के और बोले देख, तू मुझे उपदेश न दे और ये समझ की ये तेरा कम दिनी कॉन्सेप्ट ज्यादा दिनों तक सफल नही होने वाला। बेटा बोला पिता जी यह ख़याल दिल से निकाल दीजिए।
मेरा ये कांसेप्ट लाइफटाइम चलेगा। एक बार मुझे अपनी सहमति देकर तो देखिए फिर देखिए आपको भी लोग हाजी मस्तान समझकर आपसे न डरने लगें तो कहना। पिता जी बेटे की बात सुनते-सुनते चुपचाप अंदर चले गए।
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