एकीकृत परिषद की महारैली में हड़ताल की घोषणा
राजधानी आ रहे कर्मचारियों को रोकना अंग्रेजी शासन का प्रतीक
उत्पीड़न बर्दाष्त नही करेगा कर्मचारी, हक के लिए जारी रहेगी जंग
लखनऊ । प्रदेश के
कर्मचारियों की इस सरकार के बनने के बाद लगभग साढ़े तीन वर्षो में समस्याओं के ऊपर उच्च स्तर पर कई बैठकें की गई सहमतियां भी बनी, सहमति पत्र भी जारी हुए, परन्तु न आदेश हुए न षासनादेष जारी हुए हम कर्मचारियेां को क्या जबाब देते मजबूरन हमें इस महारैली का सहारा लेना पड़ा। लेकिन दुर्भाग्य देखिये कि हम आजादी के इतने वर्षो बाद भी आजाद नही इस बात का आभास आज हमें प्रदेष की इस सरकार ने करा दिया। लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने आ रहे हमारे कर्मचारियों के वाहन ही नही रोके गए बल्कि बसों और ट्रेनो से कर्मचारियों को उतार कर प्रताडि़त किया गया। हम चुप नही बैठेगें। यह बात आज एकीकृत संयुक्त परिषद की प्रस्तावित महारैली को सम्बोधित करते हुए परिषद के लगभग हर षीर्ष नेता ने अपने सम्बोधन में कही। महारैली से पूर्व आयोजित सभा की अध्यक्षता परिषद के पूव अध्यक्ष वी.पी. मिश्रा एवं रामजी अवस्थी द्वारा की गई। सभा को सम्बोधित करते हुए डिप्लोमा इंजीनियिर्स महासंघ के अध्यक्ष एस.पी. मिश्रा, यदुवीर सिंह, एस.के.पााण्डेय भूपेष अवस्थी, षिवबरन सिंह यादव, अतुल मिश्रा, एस0के0 रावत, नर्सेस संघ के अषोक कुमार, मुदित मिश्रा, रजितराम,एस.एल. पाण्डेय,विष्णु तिवारी,, गिरीष मिश्रा रोडवेज, यादवेन्द्र मिश्रा सचिवालय संघ, एस.पी. श्रीवास्तव ने सम्बोधित किया।
कर्मचारियों की इस सरकार के बनने के बाद लगभग साढ़े तीन वर्षो में समस्याओं के ऊपर उच्च स्तर पर कई बैठकें की गई सहमतियां भी बनी, सहमति पत्र भी जारी हुए, परन्तु न आदेश हुए न षासनादेष जारी हुए हम कर्मचारियेां को क्या जबाब देते मजबूरन हमें इस महारैली का सहारा लेना पड़ा। लेकिन दुर्भाग्य देखिये कि हम आजादी के इतने वर्षो बाद भी आजाद नही इस बात का आभास आज हमें प्रदेष की इस सरकार ने करा दिया। लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने आ रहे हमारे कर्मचारियों के वाहन ही नही रोके गए बल्कि बसों और ट्रेनो से कर्मचारियों को उतार कर प्रताडि़त किया गया। हम चुप नही बैठेगें। यह बात आज एकीकृत संयुक्त परिषद की प्रस्तावित महारैली को सम्बोधित करते हुए परिषद के लगभग हर षीर्ष नेता ने अपने सम्बोधन में कही। महारैली से पूर्व आयोजित सभा की अध्यक्षता परिषद के पूव अध्यक्ष वी.पी. मिश्रा एवं रामजी अवस्थी द्वारा की गई। सभा को सम्बोधित करते हुए डिप्लोमा इंजीनियिर्स महासंघ के अध्यक्ष एस.पी. मिश्रा, यदुवीर सिंह, एस.के.पााण्डेय भूपेष अवस्थी, षिवबरन सिंह यादव, अतुल मिश्रा, एस0के0 रावत, नर्सेस संघ के अषोक कुमार, मुदित मिश्रा, रजितराम,एस.एल. पाण्डेय,विष्णु तिवारी,, गिरीष मिश्रा रोडवेज, यादवेन्द्र मिश्रा सचिवालय संघ, एस.पी. श्रीवास्तव ने सम्बोधित किया।इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि यह महारैली इसलिए करनी पड़ी कि वर्ष 2013 में परिषद द्वारा ‘‘ अधिकार मंच के तत्वावधान में एक वृहद हड़ताल भी की थी। माननीय उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप से हड़ताल वापस हुई थी, उन्होने भी चार निर्धारित मांगे पूरी करने के निर्देश दिये परन्तु उनपर भी आदेश डेढ़ वर्ष बाद जारी नही हुए।’’ तमाम संगठनों की उचित मांगे श्री आलोक रंजन तत्कालीन ए0पी0सी0 की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा सुनी गई। परन्तु उनके निर्णय आज तक नही आये। इसी कारण प्रदेश के कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
एकीकृत संयुक्त परिषद के नेताओं ने आन्दोलन की घोषणा करते हुए दो अक्टूबर से सभी जिला में गांधी प्रतिमा एवं मुख्यालयों पर मौन धरना, 23 नवम्बर को पेंषन मुद्दे पर रेलवे सहित सेन्ट्र्र्र्रªल कर्मचारी यूनियन के आन्दोलन में प्रदेष बंद का आह्वान,, 14-15 दिसम्बर 15 को दो दिवसीय पेन डाउन संाकेतिक अघोषित हड़ताल तथा 23 फरवरी 16 से पूर्णकालिक हड़ताल षुरू कर दी जाएगी।
आमसभा केा बी0एस0 डोलिया, संजीव गुप्ता, अविनाश श्रीवास्तव, अशोक दुबे, अमिता त्रिपाठी, पी0के0 सिंह, प्रेमचन्द चैरसिया, सुभाषचन्द तिवारी, अशोक कुमार सिंह, धर्मेन्द्र, इं. दिवाकर राय, विष्वजीत मिश्रा, हेमन्त श्रीवास्तव, सत्येन्द्र कुमार, उमेष राव, प्रभात मिश्रा, इं. ए.के. मिश्रा, विनय कुमार श्रीवास्तव, अमरजीत मिश्रा, राजेश पाण्डेय, नीरज चतुर्वेदी, राजेश साहू शोभा शर्मा, केे.के. सचान ,मणीनायर, राजा भारत अवस्थी,, विनय कुमार श्रीवास्तव,रवीन्द्र षुक्ला, माधवराम, डाॅ. नरेष, प्रेम सिंह राणा, अनिल कुमार सिंह, दिनेष कुमार, के.के. भारद्वाज, कुलदीप बाल्मिकी,, इं. वी.के. कुषवाहा,रामतेज यादव, हरिराम उपाध्याय, अनिल पाठक, वी.के. नौटियाल,इ0 एल.एन. सचान ने कहा कि शासन की मंशा को कुछ अधिकारी पूर्ण करने में बाधक हैं, जो समय से बैठकें नही करते तथा तोड़ मरोड़ कर समस्याओं का हल नही होने देते हैं। मुख्य मंत्री एवं मुख्य सचिव को गुमराह करते हुए ये सेवानिवृत के बाद भी कर्मचारियों की समस्याओं को लम्बित रखने में माहिर हो गये है। इसी कारण इन्हें बार-बार सेवानिवृत के बाद भी विस्तार देकर लाभ पहुंचा रहे हैं। पूर्व में श्री राजनाथ सिंह, श्री कल्याण सिंह, श्री मुलायम सिंह यादव आदि द्वारा वर्ष में लगभग दो बार ‘‘परिषद’’ जैसे बड़े संगठन से वार्ता होती थी, परन्तु इस साढ़े तीन वर्ष के कार्यकाल में कोई भी वार्ता नही हो सकी। परिषद को पूर्ण विश्वास किया गया कि यदि सही समस्याओं को मुख्य मंत्री के सम्मुख लाया जाय, तब निराकरण हो सकता है। वार्तायें समझौते तीन वर्ष से बराबर उक्त समस्याओं पर ही हो रहे हैं परन्तु आदेश जारी नही हो रहे हैं। पुनः कल इन्हीं बिन्दुओ पर सहमति हुई है, जिनपर पूर्व में भी सहमति बनी थी।उन्होंने कहा कि निचले स्तर का कर्मचारी उ0प्र0 में विकास की रीढ़ है, कमियां हर जगह हो सकती हैं परन्तु विकास करते हैं तब विकास दिखता है और विकास दिख रहा है। तब राज्य कर्मचारियों की मूलभूत समस्याओं का समाधान होने पर कर्मचारी हतोत्साहित होता है तथा विद्रोह उत्पन्न होना स्वाभाविक है। इसी तरह माननीय मुख्य मंत्री जी के ध्यानाकर्षण हेतु ‘‘कर्मचारी रैली‘‘ अब हड़ताल की ओर अग्रसर है।
मुख्यमंत्री से वार्ता के आश्वासन के बाद रैली समापन
धरन के दौरान लगभग एक बजे मुख्य सचिव के बुलावे पर मुख्य सचिव कार्यालय पहुचे एकीकृत परिषद के प्रतिनिधि मण्डल को जब मुख्य सचिव ने मांग पत्र के साथ वार्ता की बात कही तो नाराज प्रतिनिधि मण्डल ने कहा कि अब वार्ता नही होगी , आदेश कर सके तो बात की जाए। इसके बाद प्रतिनिधि मण्डल ने सचिव वित्त अजय अग्रवाल को हटाने तथा सीधे मुख्यमंत्री से वार्ता कराने की बात कही। इस पर मुख्य सचिव ने आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री विदेश में है जैसे ही वे वापस आएगें वैसे ही वार्ता करा दी जाएगी। उन्होंने पूरे विश्वास से कहा कि एक सप्ताह के अन्दर वार्ता कर दी जाएगा। इस आश्वासन के बाद प्रतिनिधि मण्डल ने रैली का समापन किया।
लखनऊ रैली में पहुचने से पूर्व रोके गए 192 वाहन
खुफिया जानकारी मिलने के बाद हरकत में आए शासन के दिशा निर्देश पर आज सुबह से सभी जनपदों में रैली को प्रभावित करने के लिए जिले के प्रशासनिक अधिकारी सक्रिय हो गए है। परिणाम स्वरूप विभिन्न जनपदों में लगभग 192 वाहनों को रोक दिया गया। जिसमें लखनऊ के सभी बार्डरों पर लगभग 20, इलाहाबाद 7, रायबरेली में 20, सीतापुर 42, हरदोई 14, जौनपुर 14, गाजीपुर 10, चन्दौली 3, बाॅदा 7, फतेहपुर 2, कानपुर 15, प्रतापगढ़ 13, मुरादाबाद 7, बनारस 5, सोनभद्र 2, मिर्जापुर 8 और भदोही में 3 बसें रोकी गई।
इन मांगों पर बनी थी सहमति लेकिन आदेश और शासनादेश नही
1- किसी पद पर यदि 100 प्रतिशत पदोन्नति हो तो अर्हकारी सेवा में पूर्ण छूट दी जायेगी। लिपिक संवर्ग के लिए जारी आदेशों का क्रियान्वयन 31 जुलाई तक करा दिया जायेगा।
2- शेयर आधारित पेंशन के स्थान पर सिक्योर्ड पेंशन दी जायेगी।
3- सफाई कर्मी का निरीक्षक अधिकारी ग्राम प्रधान के स्थान पर ए0डी0ओ0 होगा।
4- ए0सी0पी0 व्यवस्था मे धारित पद के वजह से किसी भी कर्मचारी को तीन ए0सी0पी0 से वंचित नही किया जायेगा। ऐसे सभी प्रकरणों का निस्तारण होगा।
5- मंहगाई भत्ते की घोषणा के अन्तर को और कम किया जायेगा।
6-गंभीर रोगों पर कर्मचारी को ‘‘कैशलेस’’चिकित्सा सुविधा हेतु माननीय उच्च न्यायालय द्वारा निर्देश के तहत तथा सेवारत तथा सेवानिवृत कर्मचारियों को इलाज के बाद अपना धन प्राप्त करने में हो रही व्यवहारिक कठिनाईयों को समाप्त करने के लिए ‘‘कैशलेस’’ सुविधा का आदेश जारी किया जायेगा।
7- विभागीय स्तर पर उच्च अधिकारियों द्वारा मासिक बैठकें न किये जाने को स्वीकार करते हुए, अब प्रत्येक 03माह में एक बैठक प्रत्येक स्तर के अधिकारी से कर्मचारी संगठनों की हुआ करेगी तथा उनकी समीक्षा ‘‘ कार्मिक विभाग नियत प्रोफार्मे के तहत करेगा। अभी 15 अगस्त तक अनिवार्य रूप से एक बैठक सभी कर्मचारी संगठनों से कराकर उनकी समस्यायें दूर की जायेंगी।
8- वर्कचार्ज, दैनिक वेतन, 1991 बाद के बाद तैनात कर्मचारियों आदि को पेंशन का लाभ पूर्ण सेवाकाल मानते हुए दिया जायेगा। तथा तकनीकी संवर्ग जैसे जूनियर इंजीनियरों को 4800/- ग्रेड पे जिस पर प्रमुख सचिव लोनिवि की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा संस्तुति की जा चुकी है पर शीघ्र निर्णय कराया जाए।
9- 4600/- ग्रेड पे के कर्मचारियों को राजपत्रित घोषित किया जायेगा।
10- कर्मचारी संगठनों के साथ बैठकों का प्रमाण पत्र अधिकारी को अपनी वार्षिक प्रविष्टि में अंकति करना होगा।
कर्मचारियों की इन मांगों को नकारा
1- प्रदेश का अधिकारी कार्यालय आने-जाने पर एक सरकारी वाहन इस्तेमाल करता है, जिस पर लगभग 60-70 हजार रूपये प्रतिमाह खर्च आता है परन्तु अब जबकि सभी फील्ड कर्मचारी अपनी मोटरसाइकिल से सभी सरकारी कार्य त्वरित गति से निबटाते हैं उन्हें साईकिल भत्ता 100/- प्रतिमाह ही क्यों मिलेगा, वे अपने वेतन से मोटरसाईकिल नही चलायेंगे।
2- एक ही शहर में बच्चे को उसी स्कूल में पढ़ाना है जहां केन्द्रीय कर्मचारी पढ़ता है, वहीं मकान किराये पर लेता है जो केन्द्रीय कर्मचारी लेता है फिर 2008 में हम लगभग बराबर भत्ता पा रहे थे, आज दोगु ने का अन्तर क्यों है।
3- राज्य सरकार द्वारा समाप्त की गयी नकदीकरण व्यवस्था’’ या तो बहाल की जाये अथवा अवकाश न लेने पर सेवानिवृत्त के समय 300 दिवस के स्थान पर 600 दिनों का अवकाश नकदीकरण में परिवर्तित किया जाये। कर्मचारियों की इस सुविधा को शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी दिया जाये।
4- कर्मचारियों के कमी के कारण अवकाश भी नही दिया जाता और भुगतान भी नही किया जाता है इससे कर्मचारियों में रोष है।
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