मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव के साथ मंत्री एवं समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश के प्रवक्ता श्री राजेन्द्र चौधरी पांच दिन की ब्रिटेन यात्रा पर गए थे। वहां से लौटकर श्री चैधरी ने आज बताया कि 22 जुलाई से 27 जुलाई,2015 तक ब्रिटेन की यात्रा स्मरणीय रही। के दौरान जहाॅ संसद और शाही बकिंघम पैलेस देखने गए वहीं महान साहित्यकार शेक्सपीयर के गांव, क्रिकेट के लाडऱ्स मैदान, आक्सफोर्ड यूनीवर्सिटी, हाइड पार्क जैसे स्थलों पर भी गए। इस दौर में जहां भी प्रवासी भारतीय मिले मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव से मिलने और उनके साथ फोटो लेने की उनमें होड़ लगी रही। गुजरात, आंध्र, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान के अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश वासी, जो इंग्लैण्ड में जाकर बस गए हैं, उनमें मुख्यमंत्री की लोकप्रियता उल्लेखनीय रही।
लंदन से 50 मील दूर गांव खेतों के बीच जाना इस यात्रा का सबसे सुखद और रोमांचक पक्ष रहा। यहां खेतों में भेड़ो की तादाद ज्यादा दिखी। खेतों में पीली सरसों की छटा दर्शनीय थी। यहां गेहूॅ, धान के अलावा सब्जी और फल की फसलें भी होती है। भारत के गांवो से भिन्न ब्रिटिश गांवो का रहन-सहन, उनके आवास और पशु बाड़े देखकर लगता ही नहीं कि ये किसानों की बस्ती है। हम भारत के लोगांे के जेहन में अपने गांवो की ही तस्वीर रहती है जहां गांववासी अभावों और नागरिक असुविधाओं से जूझते दिखाई देते हैं। मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने गम्भीरता से स्थितियों का आकलन किया और यहां उनमें सुधार पर चिंतित दिखे।
सच तो यह है कि इस यात्रा के अनुभवों से मुख्यमंत्री के उत्तर प्रदेश केा आदर्श प्रदेश बनाने के संकल्प को नया बल मिला है। गांव खेती और किसान उनकी प्राथमिकता में प्रारम्भ से रहे हैं। उन्हें इसकी चिन्ता है कि किसान और गांव कैसे खुशहाल हों। उन्होने लंदन में फल और सब्जियों की अच्छी क्वालिटी की ओर संकेत करते हुए मुझसे कहा कि अगर भारत में भी किसानों को सुविधाएं मिल जाएं तो वे अच्छा उत्पादन कर सकते हैं। उनके उत्पादित माल का विपणन, मण्डी सुविधाएं तथा फसल का लाभकारी मूल्य मिले, इसके प्रयास और तेज किए जाएगें।
मुख्यमंत्री का यह भी कहना था कि हम पश्चिम की हूबहू नकल नहीं कर सकते हैं। हमारे पास गांधीजी, चैधरी चरण सिंह, डा0 लोहिया और श्री मुलायम सिंह यादव के विचार तथा उनका मार्गदर्शन है। हमे भारतीय समाज व्यवस्था के अनुकूल अपनी नीतियों का प्रतिपादन करना होगा। उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार सर्वांगीण विकास के लिए तत्पर है। सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, नदियों की स्वच्छता, सिंचाई सुविधा आदि पर काफी काम हो रहा है। अपनी जड़ो से जुड़ाव के साथ समाज को आधुनिकता से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री ने लैपटाप बांटा है ताकि गरीब का बेटा भी आगे बढ़ सके।
ब्रिटेन की यात्रा में हम वहां की संसद, शाही परिवार के निवास स्थल बकिंघम पैलेस के साथ ईस्ट इंडिया कम्पनी के दफ्तर तक भी गए। सात समंदर पार देश के इन स्थलों से कभी हिन्दुस्तान का राजपाट चलाया जाता था। हमारी जिज्ञासा थी कि कैसे चन्द अंग्रेजो ने आकर भारत देश केा आर्थिक, राजनीतिक गुलामी की जंजीरों में जकड़ा। ईस्ट इंडिया कम्पनी अब चाय की पत्ती बेचने का व्यवसाय करती है और वहां दार्जिलिंग की चाय भी मिलती है। यही नहीं, कम्पनी वहां चाय मुफ्त में भी पिलाती है।
आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय शिक्षा जगत में एक महत्वपूर्ण नाम है। यह लंदन से 60 मील दूर है और शिक्षा का अन्तर्राष्ट्रीय केन्द्र है। लंदन से दो घंटे का सफर कर हम शेक्सपीयर के गांव स्टैªटफोर्ड अपान ए वन पहुॅचे। शेक्सपीयर जन्म 1564 में हुआ था और मृत्यु 1616 में हुई। दुनिया के मशहूर नाटककारों में उनका नाम है। यहां एक चर्च है और इसके पास ही महान अंग्रेज नाटककार की कब्र है। चार सौ साल बीत जाने के बावजूद उनकी स्मृति को आज भी जिन्दा रखा गया हैं। हमने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। लंदन में हाइड पार्क है जहां आपको भाषण देने की आजादी है। यह साढ़े 3 सौ एकड़ में फैला है जबकि उत्तर प्रदेश में समाजवादी सरकार द्वारा बनाये गये जनेश्वर मिश्र पार्क 4 सौ एकड़ में फैला हुआ है। ब्रिटिश संसद भवन के सामने गांधी जी और चर्चिल की प्रतिमाएं स्थापित है। ब्रिजटावर्स के निकट की बिल्डिंग में कोहिनूर हीरा सुरक्षित है जो कभी भारत के बादशाहों के ताज का शोभा था।
लन्दन का वाशिंगटन होटल, जहां हम ठहरे थे, में कभी हिन्दी फिल्मों के सदाबहार हीरो देवानन्द भी ठहरते थे। होटल की खिड़कियों से सुबह शाम साइकिलों पर लोगों को घर-दफ्तर और बाजार आते जाते देखना सचमुच अच्छा लग रहा था। साधारण ही नहीं अमीर और उच्च पदस्थ अफसर भी साइकिल से आते जाते दिखाई दिए। लंदन में ईस्ट वेस्ट साइकिल सुपरहाई वे सेंट्रल लंदन लंकास्टर गेट से टावर हिल तक बन रहा है जो सन् 2016 तक बनकर तैयार होगा। अभी काम हाइड पार्क कार्नर से विक्टोरिया इक्बैंकंमेंट तथा अपर लोअर टेमस स्ट्रीट पर अप्रैल,2015 से काम चालू हैं। साइकिल टैªक बनाया जा रहा हैं। उत्तर प्रदेश में भी साइकिल से यात्रा को समाजवादी सरकार प्रोत्साहित कर रही है और राजधानी लखनऊ में तो कई साइकिल टैªक बन भी गए है। इसका और भी विस्तार होगा।
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