नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह द्वारा दायर की गई याचिका को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय से दिल्ली उच्च न्यायालय स्थानांतरित कर दिया।
मुख्यमंत्री का पक्ष रखने के लिए पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने इस स्थानांतरण का विरोध करते हुए कहा कि इससे यह गलत संदेश जाएगा कि राज्य का उच्च न्यायालय इस मामले की सुनवाई के लायक नहीं है।
इससे पहले शीर्ष अदालत ने वीरभद्र सिंह और अन्य सीबीआई की उन दो याचिकाओं पर प्रतिक्रिया मांगी थी, जिनमें सीबीआई ने सिंह और उनकी पत्नी को इस मामले में गिरफ्तारी से सुरक्षा और अन्य राहत दिए जाने का विरोध किया था। हालांकि पीठ ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के एक अक्तूबर वाले आदेश पर अंतरिम रोक नहीं लगाई थी, जिसमें सीबीआई को सिंह और उनकी पत्नी को आय से अधिक संपत्ति के मामले में गिरफ्तार करने से रोका गया था लेकिन मामले की जांच आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी थी। उच्च न्यायालय ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वह इस दंपति से पूछताछ करने से पहले अदालत को सूचित किया करे। सीबीआई ने शीर्ष अदालत में एक स्थानांतरण याचिका और विशेष छुट्टी की याचिका लगाकर सिंह के खिलाफ चल रहे इस मामले को हिमाचल प्रदेश से दिल्ली स्थानांतरित करने का और राज्य के उच्च न्यायालय द्वारा जारी किए गए आदेश को दरकिनार करने का अनुरोध किया था।
मुख्यमंत्री ने उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर करके कहा था कि केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा उनके निजी आवास और अन्य परिसरों की तलाशी ‘गलत इरादों और राजनीतिक प्रतिशोध’’ के साथ ली जा रही है। सिंह ने उच्च न्यायालय से अनुरोध किया था कि वह उनके एवं उनकी पत्नी के खिलाफ भ्रष्टाचार रोकथाम कानून की धारा 13 (2) एवं 13 (1) (ई0 के तहत और भारतीय दंड संहिता की धारा 109 के तहत सीबीआई द्वारा 23 सितंबर को दिल्ली में दर्ज की गई प्राथमिकी को खारिज कर दे।
दिल्ली उच्च न्यायालय कॉमन कॉज नामक एनजीओ द्वारा दायर की गई जनहित याचिका पर भी सुनवाई कर रही है। इसमें यह आरोप लगाया गया है कि सिंह ने लगभग पांच करोड़ रूपए का बेनामी धन प्राप्त किया है। इसमें वर्ष 2009-10, 2010-11 और 2011-12 के उनके संशोधित आयकर रिटर्नों का हवाला भी दिया गया। साथ ही यह दावा किया गया कि यह कृषि संबंधी आय में लगभग 6.10 करोड़ रूपए का इजाफा दिखाता है। आयकर विभाग ने दिल्ली उच्च न्यायालय में अपनी स्थिति रिपोर्ट दायर करते हुए दावा किया था उसके पास इस मामले की जांच का अधिकार है क्योंकि जिन संपत्तियों पर सवाल उठ रहा है, वे भी राष्ट्रीय राजधानी में स्थित हैं।
https://rashtriyadinmaan.com

