
lucknow | मेरठ विकास प्राधिकरण,की बर्खास्त बाबू रजनी कन्नौजिया ने कई अन्य लिपिकों का कच्चा चिट्ठा वीसी को डाक से भेजकर जांच की मांग की है। साथ ही एक ऑडियो रिकार्डिंग की सीडी भी भेजी गई है। इसमें दो लिपिकों की बातचीत बताई गई है। रजनी का कहना है कि वह इस मामले में दोषी नहीं असली खेल कई अन्य लिपिकों ने किया है।
एमडीए के कई बाबुओं, मेट और इंजीनियरों ने करोड़पति बनने के लिए पहले लोहियानगर में आवंटियों के प्लॉटों के आवंटन निरस्त कराए और फिर इन्हें फर्जी कागज तैयार करके बेच डाला। आवंटन की फाइलें तक गायब कर दीं और फर्जी पावर ऑफ अटार्नी भी तैयार की। इस मामले की जांच संयुक्त सचिव अजय कुमार की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय कमेटी को दी गई।
जांच के बाद मेरठ विकास प्राधिकरण संयुक्त सचिव अजय कुमार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि 14 प्लॉटों की जांच की गई और इनमें से आठ में फर्जीवाड़ा निकला। इसी आधार पर दो लिपिकों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया जबकि रजनी कन्नौजिया फरार चल रही हैं। रजनी कनौजिया द्वारा एमडीए वीसी को भेजे गए तथ्यों और सबूतों की भी जांच कमेटी ने पड़ताल शुरू कर दी है। सूचना है कि लोहियानगर में महज आठ ही प्लॉटों में ऐसा खेल नहीं हुआ बल्कि बड़े पैमाने पर ऐसे गड़बड़झाले हुए।
शास्त्रीनगर के रामापुरम में रहने वाले हरपाल सिंह यादव ने एमडीए वीसी को रजिस्टर्ड डाक से एक पत्र भेजकर बड़ा सवाल उठाया है। हरपाल का कहना है कि उनके लोहियानगर में स्थित एचआईजी प्लॉट संख्या सी 579 का आवंटन बिना उन्हें कोई सूचना दिए निरस्त कर दिया गया और 300 मीटर के प्लॉट को 100 और 200 मीटर के दो हिस्सों में बांटकर बेच डाला। इसी तरह से कैंची कलस्टर के कई प्लॉटों में भी घपला हुआ।
https://rashtriyadinmaan.com
