वायु प्रदूषण: सुप्रीम कोर्ट ने जताई भारी नाराजगी, कहा- हम लोगों को मरने के लिए नहीं छोड़ सकते


नई दिल्ली। देश में बढ़ते वायु प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वायु प्रदूषण की परेशानी अस्थमा के मरीज ही समझ सकते हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि हम लोगों को मरने के लिए नहीं छोड़ सकते।

जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने कहा कि देश में हर दिन जश्न मनाए जाते हैं। जश्न मनाना अच्छी बात है, जरूर मनाना चाहिए लेकिन जश्न में आतिशबाजी की जाती है। यह परेशानी पैदा करने वाली बात है। पीठ ने कहा कि हम लोगों को मरने के लिए नहीं छोड़ सकते। अस्थमा के मरीजों से पूछो, क्या परेशानी होती है। बच्चे भी प्रभावित हो रहे हैं। लोग अलग-अलग बीमारियों से जूझ रहे हैं। पीठ ने कहा जश्न तो ठीक है, हमें अन्य मुद्दों पर भी विचार करने की जरूरत है।

शीर्ष अदालत ने ये मौखिक टिप्पणियां पटाखा निर्माताओं के खिलाफ अवमानना याचिका और वायु प्रदूषण से संबंधित मामलों पर सुनवाई के दौरान की।

पीठ ने सीबीआई की जांच रिपोर्ट पर गौर करते हुए कहा कि रिपोर्ट में जो बातें सामने आईं है, वो बेहद गभीर हैं। प्राथमिक जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि पटाखा निर्माताओं से लिए गए सैंपल की केमिकल एनालिसिस में पाया गया कि पटाखों में प्रतिबंधित बेरियम और बेरियम साल्ट का इस्तेमाल किया गया है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बेरियम पर प्रतिबंध लगाने के बाद जमकर इनकी खरीदारी की गई। इसके अलावा पीठ ने यह भी पाया कि पटाखों में किसी अन्य चीजों का इस्तेमाल किया गया जबकि बाहरी लेवल पर कुछ और लिखा था।

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की रिपोर्ट की प्रति अवमानना नोटिस पाने वाले पटाखा निर्माताओं को देने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई छह अक्टूबर को होगी।


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