मुलायम ने अखिलेश को यूपी अध्यक्ष पद से हटाया, शिवपाल नए चीफ


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दिल्ली | समाजवादी पार्टी में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है. सोमवार को मुख्यमंत्री अखि‍लेश यादव ने मुलायम सिंह यादव और शि‍वपाल यादव के करीबी दो मंत्रियों को कैबिनेट से बाहर किया, वहीं मंगलवार को उन्होंने चीफ सेक्रेटरी दीपक सिंघल की भी छुट्टी कर दी. दिलचस्प यह है कि इस उठा-पटक में मंगलवार शाम ढलते-ढलते अखि‍लेश यादव को यूपी प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटा दिया गया. सपा प्रमुख मुलायम‍ सिंह ने उनकी जगह शि‍वपाल यादव को यूपी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है.

जाहिर तौर यूपी चुनाव से ठीक पहले सत्तासीन पार्टी के अंदर यह घमासान चुनावी गणि‍त पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है, लेकिन एक बात साफ है कि सपा में अब यह दिखाने की कवायद शुरू हो गई है कि आखि‍र असली बॅास कौन है. क्योंकि चीफ सेक्रेटरी सिंघल, खनन मंत्री पद से हटाए गए गायत्री प्रजापति और पंचायती राज मंत्री पद से बर्खास्त किए गए राजकिशोर सिंह शिवपाल के करीबी माने जाते हैं.

हमेशा विवादों में रहने वाले IAS ऑफिसर दीपक सिंघल को दो महीने पहले ही चीफ सेक्रेटरी बनाया गया था. यह बात जगजाहिर है कि अखिलेश यादव दीपक सिंघल को पसंद नहीं करते थे और उन्हें मुख्य सचिव बनाए जाने के खिलाफ थे. लेकिन मुलायम सिंह यादव के दबाव में उन्हें दीपक सिंघल को मुख्य सचिव बनाना पड़ा था.

वित्त विभाग के प्रमुख सचिव राहुल प्रसाद भटनागर को नया मुख्य सचिव बनाया गया है. राहुल भटनागर 1983 बैच के आईएएस ऑफिसर हैं और गन्ना आयुक्त समेत तमाम महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं. कहा जाता है कि अखिलेश यादव से उनका अच्छा तालमेल है.

दीपक सिंघल को फिलहाल प्रतीक्षा सूची में रखा गया है. मुख्य सचिव बनने के बाद दीपक सिंघल के तौर तरीके से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव खुश नहीं थे. कई सार्वजनिक समारोह में दीपक सिंघल मंच से जिस बेअंदाज तरीके से बोलते थे वह लगातार अखिलेश यादव को खटक रहा था.

पिछले महीने कन्या विद्याधन बांटने के एक समारोह में लोग उस समय दंग रह गए जब दीपक सिंघल ने मंच पर माइक से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से कहा था कि वह बातचीत बाद में करें, पहले उनकी बात ध्यान से सुनें. मुख्यमंत्री उस समय मंच पर मौजूद अपने सलाहकार आलोक रंजन से कुछ मशवरा कर रहे थे. दीपक सिंघल ने आलोक रंजन जो उनसे पहले मुख्य सचिव थे, उन्हें भी टोकते हुए कहा था कि सलाहकार महोदय सलाह बाद में दें. एक अन्य समारोह में दीपक सिंघल ने यह कह दिया था कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव दिल और दिमाग दोनों से बच्चे हैं.
मुख्य सचिव बनने के बाद दीपक सिंघल जिस तरह दूसरे अधिकारियों से बर्ताव कर रहे थे और उन्हें धमका रहे थे, उसकी भी शिकायतें लगातार मुख्यमंत्री को मिल रही थीं. यह भी कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में खनन को लेकर हाईकोर्ट ने जिस तरह सीबीआई जांच का आदेश दे दिया और सरकार उसकी कोर्ट में ठीक से पैरवी नहीं कर सकी. उससे भी मुख्यमंत्री खफा हुए.
सूत्रों के मुताबिक असली कारण बना रविवार को दिल्ली में अमर सिंह की पार्टी में दीपक सिंघल का शामिल होना. इस पार्टी में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव नहीं गए थे. कुछ समय पहले अमर सिंह ने अखिलेश यादव के खिलाफ कई बातें कही थीं. उसके बावजूद अपने मुख्य सचिव का अमर सिंह की पार्टी में जाना मुख्यमंत्री को बिल्कुल पसंद नहीं आया होगा.
अपनी सरकार की इमेज सुधारने में लगे अखिलेश यादव ने सोमवार को ही अपने दो कैबिनेट मंत्रियों गायत्री प्रजापति और राज किशोर सिंह को बर्खास्त कर दिया था क्योंकि उनके ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप थे .मुख्य सचिव बनने के लिए दीपक सिंघल ने मुलायम सिंह और शिवपाल यादव के दरबार में कई चक्कर लगाए थे. दीपक सिंघल को शिवपाल यादव का खास माना जाता है. कौमी एकता दल को लेकर शिवपाल यादव से अखिलेश यादव की खींचतान पहले से ही चल रही है. ऐसे में बकरीद के दिन शिवपाल यादव के करीबी ऑफिसर की कुर्बानी समाजवादी पार्टी और यूपी सरकार में क्या गुल खिलाती है इस पर सबकी नजर होगी.

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