नए डीपीआर को गोपनीय रखना कही न कहीं एलडीए और अंसल दोनों की भूमिका पर सवाल खड़े करता है। आखिर शिकायतकर्ताओं को इसकी प्रति क्यो उपलब्ध नही करायी गयी ?

लखनऊ | अंसल एपीआई टाउनशिप डीपीआर बदलाव पर दाखिल आपत्तियों की सुनवाई में कोई जिम्मेदार अधिकारी आज नही पहुचा बल्कि सभी ने अपने प्रतिनिधि भेजे । जनता बताती रही अपनी पीड़ा और अधिकारी बैठक में सोते रहे।दरसल लखनऊ अंसल एपीआई टाउनशिप का दायरा 6000 एकड़ से घटाकर 4000 एकड़ करने के प्रस्ताव के मामले में दाखिल आपत्तियो पर आज एलडीए सुनवाई हुई। इससे पहले 14 मार्च को सुनवाई के लिए बुलाया गया था लेकिन उस दिन सुनवाई नही हो सकी। आज सुनवाई में अंसल में 50 से अधिक निवासी मौजूद थे ।
प्रोजेक्ट के संशोधित डीपीआर की कॉपी अभी तक शिकायतकर्ताओं को उपलब्ध नही कराया गया है साथ ही दाखिल आपत्तियो पर शिकायतकर्ताओं को अलग अलग समय पर बुलाया गया था लेकिन सभी शिकायतकर्ता एक साथ 12 बजे एलडीए पहुचे। सुशांत गोल्फ सिटी के नए डीपीआर में ग्रीन बेल्ट और पार्क से ओपन एरिया में कटौती करते हुवे व्यवसायिक आदि प्रोजेक्ट बनाते की व्यवस्था दी गयी है जो उचित नही है साथ ही सड़कों की चौड़ाई तक कम करने का प्रस्ताव है नए डीपीआर में ग्रीनवेट को कम कर दिया गया जो आवंटियों के साथ धोखा है और एसटीपी जैसी जरूरी सुविधाएं अभी तक आवंटियों के लिए शुरू नही की गई जो सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का खुला उलंघन है।

लखनऊ जनकल्याण महासमिति के अध्यक्ष उमाशंकर दुबे ने बताया किआवंटियों की सुविधा के लिए अंसल को ही 220 केबीए का पावर सबस्टेशन बनाना था लेकिन उसे भी अभी तक तैयार नही किया गया और नए डीपीआर में भी इसका कोई जिक्र नही है। सरकार से प्रोजेक्ट के लिए 5 साल का एक्सटेंशन मिल रहा है लेकिन जो वर्षो से आवंटी अपने घर का सपना लिए बैठे है, पैसे देने के बावजूद 10 से 15 वर्षो से अधिक समय हो गए आज तक उन्हें उनका अधिकार नही मिला। आज भी वह आवंटी पैसे देने के बावजूद कभी एलडीए तो कभी अंसल आफिस में अपने सपनो के घर के लिए चक्कर लगाते है इतना ही नही नए डीपीआर में 24 मीटर की सड़क पर प्लाटिंग दिखाया गया है जबकि वहाँ मौके पर न सिर्फ सड़क बनी है बल्कि बड़े बड़े पेड़ पौधे भी लगे हुवे है। उमाशंकर दुबे ने बताया कि नए डीपीआर को गोपनीय रखना कही न कहीं एलडीए और अंसल दोनों की भूमिका पर सवाल खड़े करता है। आखिर शिकायतकर्ताओं को इसकी प्रति क्यो उपलब्ध नही करायी गयी ? जिसका उसका विस्तृत अध्ययन करके आपत्ति दाखिल करना और आसान होता।
सुशांत गोल्फ सिटी आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष शाहू ने कहा कि अंसल कोर्ट के आदेश का भी पांलन नही कर रहा क्योकि सेक्टर C- 6 में स्टेडियम और स्पोर्ट काम्प्लेक्स बनाने का प्रस्ताव था लेकिन 2015 के डीपीआर में बदल दिया गया हलाकि डीपीआर में इसे शिफ्ट करना बताया गया लेकिन कहा शिफ्ट किया जा रहा है इसे नही दिखाया गया। पिछले दिनों आवंटियों की शिकायत पर रेरा कोर्ट ने भी अंसल को आदेश दिए थे कि जगह चिन्हित करके स्टेडियम और स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स बनवाएं लेकिन वर्तमान डीपीआर में इसका भी कोई जिक्र नही है ऐसे में रेरा न्यायालय के आदेश का भी उलंघन है । इतना ही नही सेक्टर C – 7 में अंसल ने टूरिस्ट लेज़र जोन बनाने का वायदा किया था जिसे 2015 के डीपीआर में शामिल ही नही किया जबकिं इस मामले में भी रेरा कोर्ट ने टूरिस्ट लेजर जोन बनाने को कहा था लेकिन वर्तमान डीपीआर में इसका भी जिक्र नही है । अंसल से आये शिकायतकर्ताओं ने उपरोक्त सभी बिंदुओं पर आपत्ति के साथ अंसल में बने आरडब्ल्यूए के कम्प्लीट सर्टिफिकेट, ग्रीनवेल्ट, सीवर, सड़क और अतिक्रमण का मुद्दा उठाया और नए डीपीआर पर अपनी आपत्तियां दर्ज की। उमाशंकर दुबे ने बैठक में कहा कि सुशांत गोल्फ सिटी के आवंटियों के हितों को देखते हुवे जनहित में प्रोजेक्ट के संशोधित डीपीआर की कॉपी सभी आपत्तिकर्ताओं को उपलब्ध कराया जाए और साथ ही अंसल एपीआई के दाख़िल संशोधित डीपीआर को संशोधित न किया जाय।
आवंटियों ने कहा कि नए डीपीआर में जहां पुलिस स्टेशन दिखाया गया है सही मायने में वह जमीन ही अंसल की नही है।
बैठक में एलडीए वीसी की जगह सचिव पवन गंगवार ने बैठक की अध्यक्षता की वही मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, नगर आयुक्त सहित कई अन्य विभागों के प्रतिनिधि मौजूद थे। उमाशंकर दुबे ने कहा इतने गंभीर मुद्दे पर बैठक थी लेकिन कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नही था सभी ने अपने प्रतिनिधि भेज रखे थे और जो अधिक थे उसमे भी कई अधिकारी बीच बीच मे आते जाते रहे और कुछ तो पूरी मीटिंग में सोते रहे और आवंटी अपनी पीड़ा कहते हरे। ऐसा लग रहा था कि यह बैठक सिर्फ औपचारिकता मात्र के लिए बुलाई गई हो। यदि जिम्मेदार अधिकारियों को समय नही था तो बैठक किसी और दिन बुला लेते कम से कम सभी को अपनी बात जिम्मेदार अधिकारियों के सामने कहने का तो मौका मिलता।
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