विधानसभा विस्फोटक मामला, योगी ने NIA के डीजी को बुलाया


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लखनऊ: यूपी विधान सभा में विस्फोटक मिलने के मामले की लखनऊ पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. सीएम योगी आदित्यनाथ ने विस्फोटक कांड की जांच के लिए एऩआईए के डीजी को लखनऊ बुलाया है. इसके साथ ही अज्ञात लोगों के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया है.इस केस में हजरतगंज पुलिस थाने में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हो गया है. लखनऊ के एसएसपी दीपक कुमार दो थ्योरी पर जांच कर रहे है.
पहली थ्योरी ये है कि किसी विधायक ने सदन की बैठक ख़त्म होने के बाद विस्फोटक रख दिया हो. फिर इस बात की तैयारी हो कि अगले दिन विधान सभा की कार्रवाई शुरू होते ही विस्फोटक दिखा कर हंगामा किया जाए. इसे ऐसे पेश किया जाए कि हमारी जान को ख़तरा है और किसी ने मुझे मारने के लिए मेरी सीट के पास विस्फोटक रख दिया है. फिर इसी बहाने योगी सरकार से सुरक्षा ले ली जाए.
दूसरी थ्योरी ये है कि आतंकियों के किसी स्लीपर सेल का काम हो. प्लास्टिक एक्सप्लोसिव विधानसभा के अंदर रखवा कर आतंकियों ने चेक किया हो कि अंदर की सुरक्षा कितनी मजबूत है और इसे कैसे तोड़ा जा सकता है. विस्फोटक के साथ डेटोनेटर नहीं मिला.

 

बता दें कि दो दिन पहले 12 जुलाई की सुबह यूपी विधानसभा के अंदर विस्फोटक मिलने का खुलासा हुआ है. फौरेंसिक जांच मे विस्फोटक मिलने की पुष्टि हुई है, हालांकि डेटोनेटर नहीं मिला है. 150 ग्राम की मात्रा में मिले इस विस्फोटक का नाम पीईटीएन है.

12 जुलाई की सुबह यूपी विधानसभा के अंदर विस्फोटक मिला. ये उस जगह पर रखा था जहां तमाम पार्टियों के विधायक बैठते हैं. ये विस्फोटक समाजवादी पार्टी के विधायक मनोज पांडे की सीट के नीचे मिला है. मनोज ने सीएम योगी से विधानसभा की सुरक्षा और कड़ी करने की मांग की है.

क्या है पीईटीएन?

पीईटीएन बहुत शक्तिशाली प्लास्टिक विस्फोटक होता है. यह गंधहीन होता है इसलिए इसे पकड़ने में काफी मुश्किल आती हैं. खोजी कुत्ते और मेटल डिटेक्टर भी इसका पता नहीं लगा सकते. बहुत कम मात्रा में होने पर भी पीईटीएन से बड़ा धमाका हो सकता है. इसका सेना और खनन उघोग में भी इस्तेमाल किया जाता है. वह भी विशिष्ट और खास तरह के मामलों में ही पीईटीएन का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे हालात में विधानसभा तक पीईटीएन पहुंचना एक बड़ा सवाल है.

बड़ी बात यह है कि यह कोई मेटल यानी धातु नहीं होता इसलिए एक्स-रे मशीन भी इसे नहीं पकड़ पाती. यह एक रासायनिक पदार्थ होता है. साल 2011 में दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर हुए धमाके में भी पीईटीएन का इस्तेमाल किया गया था.


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