अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद शिक्षक अनुमोदन फर्जीवाड़े के स्वयं के बनाये मकड़जाल में उलझा


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lucknow |  डां.राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद में विश्वविद्यालय अधिकारियों कर्मचारियो एवं महाविद्यालय प्रबन्धन की मिली भगत से दशको से संचालित मानक विहीन,प्राचार्य एवं शिक्षक विहीन महाविद्यालय व शिक्षक अनुमोदन फर्जीवाड़े का बनाया गया मकड़जाल आज विश्वविद्यालय के ही गले की फांस बन चुका है।

विश्वविद्यालय की अधिकारिक बेबसाइट rmlaufzd.in पर अपलोड की गयी विश्वविद्यालय से सम्बद्ध महाविद्यालयों में अनुमोदित प्राचार्यो व शिक्षको के कागजी विवरण से ही स्पष्ट हैकि विश्वविद्यालय के कुलपति व कुलसचिव द्वारा दिये जा रहे बयानो में कितना विरोधाभास है। कुलपति व कुलसचिव द्वारा मीडिया में स्वयं के अधिकारिक आंकड़ो व विवरणो से पृथक बयान जारी कर आम जनमानस को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है। विश्वविद्यालय के कुलपति व कुलसचिव के अनुसार विश्वविद्यालय से सम्बद्ध कुल 630 महाविद्यालय है जिनमें से 100 महाविद्यालयों में प्राचार्य नहीं है और 127 महाविद्यालयों को शिक्षक विवरण उपलब्ध न करने के कारण ब्लैकलिस्टेड घोषित किया गया है, तो सवाल उठता हैकि क्या शेष महाविद्यालयों में मानक के अनुरुप प्राचार्य व शिक्षक अद्यतन कार्यरत है !

वास्तविकता तो यह हैकि
विश्वविद्यालय की अधिकारिक बेबसाइट के अनुसार परिक्षेत्र के कुल 286 स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों द्वारा ही अभी तक अनुमोदित व कार्यरत प्राचार्यो का विवरण उपलब्ध कराया गया है। यद्यपि विश्वविद्यालय परिक्षेत्र के कुल 630 महाविद्यालयों में से 29 राजकीय एवं अनुदानित अशासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत प्राचार्यो को छोड़ दिया जाय तो भी 602 महाविद्यालयों में अनुमोदित प्राचार्य का विवरण होना चाहिए। लेकिन बेबसाइट पर अपडेट कागजी विवरणाधीन 286 प्राचार्यों में अनुदानित अशासकीय महाविद्यालय भी ऊ शामिल है, और महाविद्यालय कोड 443 और 468 पर दो दो व्यक्तियो को प्राचार्य के रुप कार्यरत दर्शाया गया है। जब कि महाविद्यालय कोड 06,125,150,151.196, 230,329,332,427,470,474,597,604,657,704, सहित कुल 15 महाविद्यालय प्राचार्यो का नाम सन्देहास्पद(लाल निशान लगा हुआ) है। ऐसे में यदि 286 में से उक्त 18 सन्देहास्पद प्राचार्यो को हटा दिया जाय तो अभी तक कुल 602 स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में से मात्र 268 में ही कागजी प्राचार्य है। बावजूद इसके विश्वविद्यालय परिक्षेत्र के 334 प्राचार्य विहीन महाविद्यालयों के बदौलत नये शैक्षणिक सत्र 2018-19 की शुरुआत जोर शोर से चल रही है।

दूसरी तरफ विश्वविद्यालय की अधिकारिक बेबसाइट के अनुसार विश्वविद्यालय परिक्षेत्र के कुल 382 महाविद्यालयो द्वारा ही अनुमोदित शिक्षको का कागजी विवरण अपलोड किया गया है, जिसके अनुसार आज की तिथि 05.07.2018 में उक्त महाविद्यालयों कुल 4468 अनुमोदित शिक्षक कार्यरत दर्शाये गये है, मौके पर महाविद्यालयों में 4468 कागजी अनुमोदित शिक्षकों में से धरातल पर कितने कार्यरत है यह कुलपति,कुलसचिव या फिर भगवान ही जाने ??

प्राचार्य/शिक्षक एवं मानक विहीन महाविद्यालयों को कक्षा संचालन की अनुमति कैसे और किसके द्वारा दी गयी ??…….

विश्वविद्यालय की पारदर्शी व्यवस्था की पोल आज स्वयं विश्वविद्यालय की बेबसाइट ही उजागर कर रही है। विश्वविद्यालय के जिम्मेदार अधिकारियो कर्मचारियो एवं महाविद्यालय प्रबन्धको की मिलीभगत से परिक्षेत्र के प्राचार्य और शिक्षक विहीन महाविद्यालयों को दशको नियम कानून व नियमावली को मोटे लिफाफे के भीतर रखकर कक्षा शिक्षण की अनुमति प्रदान कर भ्रष्टाचार एवं अनियमितता का नंगा नाच किया जा रहा है। यहीं नहीं विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित अनुमोदित शिक्षक सूची के अवलोकन से ही विश्वविद्यालय के भ्रष्टाचार की पोल खुल चुकी है। सूची में सैकड़ों ऐसे महाविद्यालय है जिनमें मात्र 01 या 02 शिक्षको का ही विवरण अद्यतन कार्यरत के रुप में अपलोड किया गया है। आखिर प्रारम्भिक तौर पर 07 विषयो की मान्यता व सम्बद्धता वाले महाविद्यालयों को मात्र 01 या 02 शिक्षको के आधार पर ही कक्षा शिक्षण की अनुमति कैसे दी गयी है ? इस प्रकार के अधिकांश महाविद्यालय स्नातक परास्नातक के साथ ही बी.एड.जैसे पाठ्यक्रम के संचालन से भी जुड़े हैं।

कुलपति अवध विश्वविद्यालय की पारदर्शिता के दावे की हवा निकलने में लगे है विश्वविद्यालय के ही जिम्मेदार…..

आज अवध विश्वविद्यालय में मात्र नये कुलपति के रुप में प्रो.मनोज दीक्षित का आगमन हुआ है, जिनके निर्देश पर आज अवध विश्वविद्यालय पारदर्शिता व भ्रष्टाचार मुक्तता का दम्भ अवश्य भर रहा है, लेकिन हकीकत तो यहीं हैकि कुलपति को छोड़ कर विगत 18 बर्षो से विश्वविद्यालय परिक्षेत्र के मानक विहीन प्राचार्य विहीन एवं शिक्षक विहीन व शिक्षक अनुमोदन फर्जीवाड़ा को अनुमोदन समितियों/पैनलो एवं जांच समितियों में शामिल होकर मोटे लिफाफे की लालसा में भ्रष्टाचार अनियमितता व फर्जीवाड़े को प्रश्रय प्रदान करने वाले व महाविद्यालय प्रबन्धनो की चरण वन्दना करने वाले विश्वविद्यालय व विश्वसनीय परिक्षेत्र के सभी कलाकार अधिकारी कर्मचारी एवं स्थायी शिक्षक तो पुराने ही है।

विश्वविद्यालय/महाविद्यालय सूत्रो की माने तो, आज भी जारी है ब्लैकलिस्टेड कालेजो से  खेल …..

कुलपति अवध विश्वविद्यालय की पारदर्शिता की सारी कवायद को धता बताते हुए कुछ महाविद्यालय प्रबन्धनो से प्राप्त सूचना के अनुसार आज भी जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा प्रवेश की अनुमति प्रदान करने के लिए सौदेबाज़ी का खेल जारी है। यहाँ तक आश्वासन दिया जा रहा हैकि किसी तरह कागज में ही मात्र 01 शिक्षक का अनुमोदन बेबसाइट पर अपलोड करवा दीजिए तो प्रवेश की अनुमति दिलवा दिया जायेगा।


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