सामने आया अयोध्या अवध विश्वविद्यालय प्रशासन का दोहरा चरित्र


 

एडेड डिग्री कालेज के स्थायी शिक्षक मात्र दो वर्ष के अनुभव पर बनाये गये पेपर सेटर जबकि इन्ही कालेजो में 15 वर्ष से कार्यरत स्ववित्तपोषित शिक्षक को नहीं मिला पेपर सेटर का अधिकार !!!

lucknow   |    अवध विश्वविद्यालय अयोध्या प्रशासन  का दोहरा चरित्र एक बार फिर सामने आ ही गया कि एक तरफ एडेड डिग्री कालेजो में नियुक्त स्थायी शिक्षको को मात्र दो वर्ष के शिक्षण अनुभव के आधार पर पेपर सेटर सहित अन्य विश्वविद्यालयीय दायित्व सौंपे जा रहे है तो दूसरी तरफ इन्हीं एडेड डिग्री कालेजो में 15 वर्षो से कार्यरत स्ववित्तपोषित शिक्षको को आज तक पेपर सेटर सहित अन्य विश्वविद्यालयीय दायित्वो से मात्र इसलिये बंचित रखा गया हैकि इन स्थायित्व का लेबल नहीं लगा है ?

आखिर एक ही महाविद्यालय व एक ही विषय विभाग में कार्यरत स्थायी शिक्षक नियुक्ति के समय से ही अनुभवी हो जाता हैकिन्तु स्ववित्तपोषित शिक्षक पन्द्रह वर्षो के शिक्षण कार्य के बाद भी अनुभवहीन ही रह जाता है। इस प्रकार की दोहरी मानसिकता का खुलासा तब हुआ जब बी.ए.भाग एक मध्यकालीन इतिहास विषय के वस्तुनिष्ठ प्रश्नो की गलत उत्तर कुंजी बनाने वाले के.एन.आई.पी.जी.कालेज के शिक्षक डां.शक्ति सिंह के विरुद्ध कार्यवाही की गयी। लेकिन सवाल यह भी हैकि आखिर डां.शक्ति सिंह को मात्र दो वर्ष के अनुभव के आधार पर ही कुलपति और परीक्षा नियंत्रक अवध विश्वविद्यालय द्वारा पेपर सेटर कैसे व किस नियम के तहत बनाया गया ?

इस पर अवध विश्वविद्यालय अनुदानित महाविद्यालय स्ववित्तपोषित शिक्षक संघ के महामंत्री डां.जितेन्द्र कुमार त्रिपाठी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि इसका जवाब विश्वविद्यालय प्रशासन को देना ही होगा।


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