
‘बुआ’ मायावती ने अखिलेश को बताया ‘बबुआ’ सीएम
लखनऊ। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर आज बसपा सुप्रीमो मायावती ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने इस मौके पर कहा कि मैंने बाबा साहेब के नाम पर जो स्मारक बनाये हैं, उन्हें देखने के लिए हजारों लोग रोज आते हैं. यह स्मारक प्रदेश का गौरव बढ़ाता है. जबकि प्रदेश के बबुआ सीएम उसे फिजलूखर्ची बता रहे हैं. उन्होंने कहा कि प्रदेश के बबुआ सीएम कभी बाबा साहेब की जयंती पर छुट्टी घोषित कर देते है और कभी रद्द. उन्होंने कहा कि इन्हें सपने में भी हाथी दिखता है. वे इतने परेशान हैं कि हर भाषण में हाथी का जिक्र करते हैं और हमारे चुनाव चिह्न का प्रचार हो रहा है.
इस अवसर पर मायावती ने सपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सैफई महोत्सव पर सपा की सरकार गरीबों का पैसा बेदर्दी से खर्च करती है, उससे तो कोई आय भी नहीं होती है.मायावती ने कहा कि बाबा साहेब ने जो संविधान लिखा वह भाजपा और आरएसएस को पसंद नहीं, क्यों यह संविधान सभी धर्मों को ध्यान में रख कर लिखा गया है, जबकि भाजपा देश पर हिंदुत्व को सौंपना चाहती है. उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने खुद को काबिल बनाया और लोगों को गुलामी से मुक्त कराने के लिए संघर्ष किया। बसपा की मुखिया मायावती ने दावा किया कि धर्मनिरपेक्षता की बुनियाद पर देश का संविधान बनाने वाले बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर के प्रति गंदी मानसिकता की वजह से ही भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अयोध्या में विवादित ढांचा गिराने के लिए छह दिसम्बर का दिन चुना था। मायावती ने अम्बेडकर के 61 परिनिर्वाण दिवस पर यहां आयोजित कार्यक्रम में कहा कि वर्ष 1992 में केन्द्र में कांग्रेस और प्रदेश में भाजपा की सरकार के शासनकाल में अयोध्या के विवादित ढांचे को खण्डित करने के लिए अम्बेडकर परिनिर्वाण दिवस यानी 6 दिसम्बर को इसलिए चुना गया था, क्योंकि बाबा साहब ने धर्मनिरपेक्षता के आधार पर संविधान बनाया था, जो इन ताकतों को पसंद नहीं था।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और संघ के लोग यह कतई नहीं चाहते कि हिन्दुओं को छोड़कर अन्य धर्मों के मानने वाले लोग मान-सम्मान की जिंदगी जिए। वे नहीं चाहते कि उनके धार्मिक स्थल और भविष्य सुरक्षित रहें। अम्बेडकर ने उनकी मानसिकता को भांप लिया था, इसे ध्यान में रखते हुए धर्मनिरपेक्षता की बुनियाद पर संविधान बनाया। भाजपा और संघ के लोगों ने गंदी मानसिकता के तहत अम्बेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर विवादित ढांचे को खण्डित किया। बसपा मुखिया ने कहा कि कांग्रेस और भाजपा के लोग मुस्लिम समाज के गरीबों को आर्थिक आधार पर आरक्षण सपने में भी देने को नहीं तैयार हैं। बसपा इसके लिए संसद के अंदर और बाहर आवाज उठाती रही है। उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा कि इन लोगों को संविधान नहीं पसंद है। ये लोग इसे बदलना चाहते हैं, आप लोगों को इनसे सावधान रहने की जरूरत हैं। उन्होंने कांग्रेस और भाजपा पर घ्हमला बोलते हुए कहा कि दोनों पार्टियों ने पिछड़े समाज को बांटने की कोशिश की। हमारे लोग बाबा साहब भीमराव अंबेडकर को भारत रत्न दिया जाए, इसके लिए बहुत संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि मैं अति पिछड़े वर्ग के लोगों को बताना चाहती हूं कि वीपी सिंह की जब सरकार बनी थी, तब हमारी पार्टी के तीन सांसद चुने गए थे। मैं खुद लोकसभा में चुनकर गई थी। उस समय वीपी सिंह की सरकार ने बसपा से समर्थन मांगा। बसपा ने वीपी सिंह को तीन शर्त पर समर्थन दिया था। इनमें से तीन शर्त में पहली शर्त बाबा साहब को भारत रत्न दिए जाने की मांग थी। इसके अलावा दूसरी मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू करना और तीसरी भाजपा की कमंडल यात्रा का एजेंडा नहीं लागू होने देना थी। तीनों शर्तों को मानने के बाद भाजपा ने वीपी सिंह की सरकार से समर्थन वापस ले लिया था, तब सरकार गिर गई थी। इससे साबित होता है कि भाजपा दलित, अल्पसंख्यक आदि के साथ साथ बाबा साहब की विरोधी है। पीएम मोदी ने ओबीसी वर्ग का हक मारने के साथ साथ उनके साथ छलावा करने का भी काम किया है।
मायावती ने कहा कि भाजपा ने ज्यादातर सरकारी कार्य प्राइवेट सेक्टर को देना शुरू कर दिया है। इससे आप लोगों का आरक्षण पहले से कम हो जाएगा। बीजेपी एंड कंपनी बाबा साहब के नाम पर प्रतिमा स्थापित करने की बात क्यों न करते रहें लेकिन तो भी लोग इनके बहकावे में आने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सपा सरकार में जो-जो बड़े आर्थिक फैसले लिए गए हैं, उसकी जांच कराई जाएगी और जो दोषी पाए जाएंगे, उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा। इसके लिए यूपी की जनता को यहां बीएसपी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनाना जरूरी है।
रैली में भाषण देते हुए मायावती ने कहा कि चुनाव के नजदीक विरोधी पार्टी के लालचों से सावधान रहना है। पीएम मोदी और भाजपा की हवा हवाई बातों से भी जनता को दूर रहना है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के आम चुनावों के नजदीक होने से जो शिलान्यास और घोषणाएं कर रहे हैं, वो चुनावों के बाद ठंडे बस्ते में चली जाएंगी। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद पीएम मोदी गाजीपुर रैली में विरोधी पार्टी से कह रहे थे कि ये कैसे चुनाव लड़ते हैं। नोटबंदी से बुरा प्रभाव बसपा पर नहीं पड़ेगा क्योंकि हमारी पार्टी पॉलिटिकल बाद में है, मूवमेंट पहले है। उन्होंने कहा कि जब बीजेपी की परिवर्तन रैली होती है, तो भाड़े की भीड़ लाते हैं तब जाकर ये अपनी रैली कर पाते हैं। उन्होंने कहा कि आप लोग भाड़े की भीड़ ले आओ लेकिन चुनाव में ये हथकंडा काम नहीं आएगा।
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