
लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने कहा है कि बीजेपी के नेताओं पर चिंता की लकीरें इसलिए नहीं हैं क्योंकि उन्होंने अपने नोटों को पहले ही ठिकाने लगा दिया है। 500 और 1,000 रुपए की नोटबंदी का जिक्र करते हुए उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की भी तीखी आलोचना की। उनका कहना है कि देश की जनता की परेशानियों की अनदेखी करके उसकी परवाह नहीं करना बीजेपी और उसकी सरकारों का नया फैशन हो गया है।
अमित शाह के आजमगढ़ में दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मायावती ने कहा कि ‘रोजगार ठप्प होने के बाद अपनी कमाई का जमा थोड़ा धन भी काम नहीं आने पर अफरातफरी मची हुई है। भुखमरी के हालात झेलने वाले लोग वापस अपने-अपने घर लौटने को मजबूर हो रहे हैं।’
मायावती ने एक बार फिर पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने की मांग करते हुए कहा कि यदि पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार वास्तव में पूर्वांचल के पिछड़ेपन के प्रति चिंतित और संवेदनशील हैं तो उन्हें अलग से पूर्वांचल राज्य बनाने की कार्रवाई शुरू कर देनी चाहिए। इस संबंध में बसपा के राज्य के विभाजन का विधानसभा से पारित प्रस्ताव केन्द्र सरकार के समक्ष पहले से लंबित है।
मायावती ने कहा कि जिस तरह बिहार विधानसभा चुनाव से पहले वहां के लोगों को गलतबयानी के आधार पर बरगला कर वोट प्राप्त करने की नाकाम कोशिश पीएम मोदी द्वारा की गई थी। ठीक उसी तरह अब यूपी के लोगों को भी चुनाव से पहले बहकाने का प्रयास किया जा रहा है।
मोदी सरकार ने अपने ढाई वर्षों के शासनकाल में देश के लोगों की घोर उपेक्षा की है। जनकल्याण से जुड़ा एक-चौथाई वायदा भी अब तक पूरा नहीं किया है। इसलिए बीजेपी को अब कोई नया वायदा करने का नैतिक अधिकार नहीं है। उसे पहले लोकसभा चुनाव के दौरान् किया गया वायदा पूरा करना चाहिए। विदेश से कालाधन लाकर हर गरीब परिवार के सदस्य को 15 से 20 लाख देने का वायदा पूरा करना चाहिए।
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