बुआ-बबुआ की जोड़ी गोरखपुर-फूलपुर उपचुनाव में भारी ,सपा ने जीती दोनों सीट


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लखनऊ : उत्तरप्रदेश उपचुनाव के नतीजे भाजपा के लिए बेहद निराश करने वाले हैं. उत्तरप्रदेश में लोकसभा की दो सीटों पर गोरखपुर और फूलपुर के लिए हुई वोटिंग में आज भाजपा के दोनों उम्मीदवार हार गये और समाजवादी पार्टी ने इन पर कब्जा कर लिया. फूलपुर सीट सपा के उम्मीदवार ने लगभग 60 हजार व गोरखपुर सीट प्रवीण निषाद ने लगभग 22 हजार वोटों से जीती. वहीं, बिहार की अररिया लोकसभा सीट पर वह लालू प्रसाद यादव की राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार सरफराज आलम ने कब्जा कर लिया. एक महीने के अंदर भाजपा के लिए यह दूसरा झटका है, जब उसे राजस्थान उपचुनाव के बाद यूपी और बिहार में हार का सामना करना पड़ा. राजस्थान में भाजपा के पास मजबूत चेहरा वसुंधरा राजे थीं, तो उत्तरप्रदेश में उसके पास योगी आदित्यनाथ जैसे हिंदुत्व के तेजी से उभरते प्रतीक हैं, जिनके बारे में विश्लेषकों का एक तबका यह मान कर चल रहा है कि नरेंद्र मोदी के बाद वही भाजपा के नेतृत्व के सबसे बड़े दावेदार होंगे. योगी आदित्यनाथ ने हार को स्वीकार करते हुए इसके कारणों की समीक्षा की बात कही है और सपा-बसपा पर सौदेबाजी का आरोप लगाया है.

गोरखपुर भाजपा के लिए चार-पांच शीर्ष प्रतिष्ठा सूचक सीटों में एक है, जहां वह हर हाल में जीतना चाहती है. ऐतिहासिक रूप से गोरखपुर सीट से गोरक्षनाथ मठ के महंत या उनकी अनुपस्थिति में हिंदुत्ववादी चेहरे जीतते रहे हैं. योगी भी इसी परंपरा की एक कड़ी रहे हैं और वे यहां से लगातार विजयी होते रहे और पिछले साल मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने यह सीट छोड़ दी थी और पार्टी की ओर से अपने पसंद के शख्स उपेंद्र दत्त शुक्ला को उम्मीदवार बनवाया. वहीं, समाजवादी पार्टी ने यहां से प्रवीण निषाद को उम्मीदवार बनवाया. जबकि फूलपुर सीट से आजादी के बाद जवाहर लाल नेहरू व उनके निधन के बाद उनकी बहन विजया लक्ष्मी पंडित लड़ते व जीतते रहे. बाद में समाजवादियों का दबदबा इस सीट पर हुआ और पहली बार 2014 में मोदी लहर में भाजपा के केशव प्रसाद मौर्य इस सीट से जीते. मौर्य अब राज्य में डिप्टी सीएम हैं और उन्होंने इस कारण यह सीट छोड़ दी. योगी और मौर्य दोनों के लिए अपने प्रत्याशियों को यहां से जीत दिलाना हर हाल में जरूरी रहा है. पर परिणाम उलटा रहा है.

इस उपचुनाव में सपा को बसपा का समर्थन हासिल था, जिसके एवज में राज्यसभा चुनाव में बसपा को सपा ने समर्थन दिया है. यानी भाजपा की बढ़ती ताकत ने बुआ और बबुआ को करीब ला दिया है. जीत के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रेस कान्फ्रेंस कर बसपा प्रमुख मायावती को विशेष रूप से धन्यवाद दिया और इसे सामाजिक न्याय व दलितों की एकजुटता की जीत बताया. यानी उन्होंने भावी गंठबंधन का संकेत भी लगे हाथ दे दिया. बिहार व यूपी की जीत से उत्साहित  तेजस्वी यादव ने राष्ट्रीय स्तर पर महागंठबंधन बनाने का प्रस्ताव रख दिया है.


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