दिल्ली सरकार दो नगर निगमों को 551 करोड़ रुपए का कर्जा देगी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने यह ऐलान करते हुए आरोप लगाया कि निगम कर्मचारियों की मौजूदा हड़ताल के जरिए राष्ट्रीय राजधानी में केन्द्र का शासन थोपने के लिए आधार तैयार किए जा रहे हैं।
बेंगलुरु में अपनी प्राकृतिक चिकित्सा कराने गए केजरीवाल ने कहा भाजपा के शासन वाले नगर निगमों में भारी घोटाले हुए हैं। उन्होंने इनकी सीबीआई जांच की मांग करते हुए कहा कि उनकी सरकार को स्थानीय निकायों का कोई पैसा नहीं देना है।
केजरीवाल ने कहा कि 551 करोड़ रुपए के कर्ज के अलावा दिल्ली सरकार उत्तरी दिल्ली नगर निगम के लिए 142 करोड़ रुपए भी जारी कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसा दिखाने की कोशिश की जा रही है जैसे दिल्ली नगर निगमों में वित्तीय संकट के लिए दिल्ली सरकार जिम्मेदार है। हालांकि निगमों पर पिछले 10 साल से भाजपा काबिज है। नगर निगमों में भारी घोटाले हुए हैं। निगम कर्मचारियों की हड़ताल के जरिए ऐसी स्थिति पैदा कर दी गई है जैसे दिल्ली में संकट है।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की तानाशाही प्रवृत्ति है। किसी ने मुझे बताया कि ऐसी हालत पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं जिससे दिल्ली में भी अरुणाचल प्रदेश की तरह राष्ट्रपति शासन लागू हो जाए।
अगले वर्ष के निगम चुनाव जीतने का विश्वास व्यक्त करते हुए केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली नगर निगमों में हालत यह है कि उन्हें भंग करके ताजा चुनाव कराए जाने चाहिएं।
उन्होंने कहा कि दिल्ली नगर निगमों के कर्मचारियों के 19 संगठनों के संयुक्त मोर्चे ने नगर निकायों को भंग करके उन्हें दिल्ली सरकार के अधीन लाने का आह्वान किया है। इस बीच नगर निकायों के सफाईकर्मियों की हड़ताल आज आठवें दिन में प्रवेश कर गई। इससे कूड़ा निपटान की प्रणाली चरमरा गई है। बाद में नगर निकायों के अंतर्गत आने वाले स्कूलों और अस्पतालों के कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हो गए।
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