
प्रमुख सचिव आवास मुकुल सिंघल ने नाराजगी जताई
लखनऊ | गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग) प्राधिकरण की कार्यप्रणाली में बदलाव लाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सभी बाबुओं को हाईटेक बनाने के निर्देश दिए। ऐसे में अब प्राधिकरण के सभी कार्य ऑनलाइन होंगे। इतना ही नहीं, सभी बाबू अपना कार्य कंप्यूटर और इंटरनेट के माध्यम से करेंगे ताकि कार्य में पारदर्शिता बनी रहे।प्रमुख सचिव (आवास) मुकुल सिंघल की मौजूदगी में जीडीए उपाध्यक्ष कंचन वर्मा, प्राधिकरण के विभागीय अधिकारियों और कैग की महालेखाकार विनीता मिश्रा की लखनऊ में बैठक हुई। इस दौरान कैग टीम ने जीडीए की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।
जीडीए में 10 अप्रैल से कैग टीम जांच कर रही थी। इस दौरान कैग ने विभिन्न विभागों की फाइले मांगी। इन फाइलों को देने में जीडीए के अधिकारियों को काफी समय लग रहा था। साथ ही इनका रिकार्ड भी किसी कंप्यूटर में सेव नहीं था। ऐसे में फाइल की विस्तृत जानकारी लेने के लिए स्टोर रूम में फाइल ढूंढ़ी जाती थी। जीडीए के बाबू भी कंप्यूटर या इंटरनेट का प्रयोग नहीं कर रहे थे। लोगों भी शिकायत लेकर जीडीए के चक्कर लगाते रहे थे। प्राधिकरण के बाबुओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने की शिकायते भी कैग टीम को मिली। इन सभी व्यवस्थाओं पर कैग टीम ने कई बार नाराजगी जताई थी।
इसी के चलते कैग ने जीडीए की कार्यप्रणाली को सुधारने के लिए एक प्रजेंटेशन बनाया था। करीब दो घंटे चली बैठक में कैग ने इस प्रजेंटेशन को जीडीए अधिकारियों को दिखाया और प्राधिकरण की कार्यप्रणाली में सुधार करने के निर्देश दिए। ऐसे सुधरे प्राधिकरण की कार्यप्रणालीकैग ने प्राधिकरण में काम कर रहे बाबुओं को हाईटेक बनाने पर जोर दिया है। इसके तहत बाबुओं को कंप्यूटर की ट्रेनिंग देते हुए इंटरनेट की जानकारी देने को कहा है। साथ ही प्राधिकरण को पेपर वर्क से ज्यादा कंप्यूटर का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। इसमें लोगों की शिकायत कंप्यूटर पर सुनने और अधिकारियों व कर्मचारियों की रिपोर्ट कंप्यूटर पर तैयार करने, प्राधिकरण की फाइलों का डाटा कंप्यूटर पर रखने के निर्देश दिए हैं।
जीडीए में जमीन आवंटन के नाम पर हुआ भारी गोलमाल
कैग और जीडीए की बैठक में जमीन आवंटन से लेकर ठेका देने तक में व्यापक पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आई हैं। कैग ने जीडीए अधिकारियों से इस संबंध में जवाब मांगा तो उन्होंने गोलमोल जवाब दिए। जीडीए अधिकारियों ने कहा कि शासन के निर्देशों पर सभी फैसला हुआ है। दरअसल, कैग ने पिछले पांच सालों में जीडीए में हुए कार्यों की जांच की है। जांच में उसे भारी गड़बड़ियां मिली हैं। सूत्रों का कहना है कि कैग टीम ने इंजीनियरिंग, प्लानिंग, प्रवर्तन, प्रॉपर्टी, उद्यान सेक्शन सहित अन्य विभागों से संबंधित सवाल पूछे हैं। कैग के सवालों का जवाब जीडीए अधिकारियों से मांगा गया। जीडीए ने हर मामले में गोलमोल जवाब दिया है। अधिकतर में तो यह कहा गया है कि शासन से मिले निर्देशों के आधार पर फैसले हुए हैं।
सूत्रों का कहना है कि प्रमुख सचिव आवास ने इस पर नाराजगी जताई है। उन्होंने जीडीए अधिकारियों से कहा है कि कैग द्वारा पूछे गए सवालों का स्पष्ट जवाब दिया जाए। आवास विभाग इसके बाद कैग को जवाब भेजेगा।
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