
प्रधान न्यायाधीश ने कहा है कि शीर्ष न्यायालय में 58,669 मामले लंबित हैं और नये मामले दर्ज होने के चलते इस संख्या में वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों की कमी के चलते कानून के सवाल से जुड़े अहम मामलों पर फैसला करने के लिए जरूरी संख्या में संविधान पीठें गठित नहीं की जा रही हैं।
उन्होंने लिखा है, ”आप याद करें कि करीब तीन दशक पहले 1998 में उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की मंजूर संख्या 18 से बढ़ा कर 26 की गई थी और फिर दो दशक बाद 2009 में इसे बढ़ा कर प्रधान न्यायाधीश सहित 31 किया गया, ताकि मामलों के निपटारे में तेजी लाई जा सके।”
गोगोई ने लिखा है, ”मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि कृपया इस पर शीर्ष प्राथमिकता के साथ विचार करें, ताकि उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ सके और यह अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सके क्योंकि समय पर न्याय मुहैया करने के अपने अंतिम लक्ष्य को पाने में इसे लंबा सफर तय करना है…”
प्रधान न्यायाधीश ने अब तक तीन पत्र लिखे हैं। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के कैडर का आकार अतीत में बढ़ा है, फिर भी शीर्ष न्यायालय में इसके अनुपात में न्यायाधीशों की संख्या में वृद्ध नहीं हुई है। सीजेआई ने दूसरे पत्र में मोदी से एक संविधान संशोधन विधेयक लाने पर विचार करने को कहा है, ताकि उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति उम्र बढ़ा कर 62 से 65 साल की जा सके।
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