ट्रेड वॉर का फायदा उठाने के लिए की कॉर्पोरेट टैक्स में कटौतीः निर्मला सीतारमण


 

नई दिल्ली | लोकसभा में कॉर्पोरेट टैक्स कटौती पर चर्चा के दौरान अधीर रंजन चौधरी के बयान पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने न सिर्फ करारा जवाब दिया, बल्कि अर्थव्यवस्था पर सरकार के रुख का बचाव भी किया। उन्होंने कहा कि वह आलोचनाओं के डर से पीछे भागने वाली नहीं हैं और जिस कॉर्पोरेट टैक्स की कटौती के कदम पर हंगामा मचाया जा रहा है, वह ट्रेड वॉर और दुनियाभर की अर्थव्यवस्था हो रही उथल-पुथल का फायदा उठाने के लिया उठाया गया था।

लोकसभा में कॉर्पोरेट टैक्स कटौती पर चर्चा के दौरान अधीर रंजन चौधरी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को ‘निर्बला’ सीतारमण बता दिया।

कांग्रेस पर हमला करते हुए वित्त मंत्री ने कहा, ‘कांग्रेस आज किसानों के लिए बड़ी-बड़ी बातें कर रही है, लेकिन वह तब कहां थी, जब वह बाली में डब्लयूटीओ के समझौते पर हस्ताक्षर कर आई थी। अगर प्रधानमंत्री मोदी पीएस क्लॉज नहीं लाए होते तो किसानों को न तो आज एमएसपी मिल पाता और न ही जनवितरण प्रणाली के तहत अनाज और अन्य वस्तुओं वितरण हो पाता।’

वित्त मंत्री ने अधीर रंजन चौधरी के बयान की ओर इशारा करते हुए कहा सीतारमण ने कहा कि हम आलोचनाओं से पीछे भागने वाले नहीं हैं। उन्होंने दूसरी तिमाही में जीडीपी के 4.5 फीसदी के निचले स्तर पर जाने को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा, ‘ऐसा पहली बार नहीं है कि जीडीपी विकास दर का आंकड़ा 4.5 फीसदी आया है। पहले की सरकारों में भी जीडीपी की दरें कम हुई हैं।’

प्रत्यक्ष कर संग्रह से जुड़े सुप्रिया सुले के सवाल के जवाब में वित्त मंत्री ने कहा, ‘आपको पता होना चाहिए कि इसमें कमी नहीं आई, बल्कि बढ़ोतरी हुई है और लगातार बढ़ोतरी हो रही है।’

सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) की बिक्री के बारे में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस वाले पीएसयू की बदहाली की बात कर रहे हैं और घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं। यह वही कांग्रेस है, जिसने भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) को 4जी के लिए पैसों का आवंटन नहीं किया। यूपीए के सरकार द्वारा बीएसएनएल को दरकिनार किए जाने की वजह से इसकी हालत खराब हुई और अन्य कंपनियों की भी यही हालत हुई है।’ उन्होंने बीएसएनएल पर सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि एनडीए सरकार बीएसएनएल को बचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

वित्त मंत्री में राजकोषीय घाटे पर एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, ‘यूपीए की सरकार में राजकोषीय घाटा औसतन 5.5 रहा है और हमारी सरकार में यह औसतन 5.6 फीसदी रहा है। हमने राजकोषीय घाटे का जो पहला स्तर है, उसे बरकरार रखने का प्रयास किया है।’


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