
- मेगा, मेगा प्लस और सुपर मेगा श्रेणी की औद्योगिक इकाइयों के लिए फास्ट-ट्रैक मोड में 15 दिनों में भूमि का आवंटन किया जाएगा
- यह सुनिश्चित करने के लिए कि निवेशक फास्ट-ट्रैक परियोजनाओं के लिए आवश्यकता से अधिक भूमि प्राप्त नहीं करे, फास्ट-ट्रैक मोड की परियोजनाओं के लिए न्यूनतम रु 2 करोड़ प्रति एकड़ का मानदंड अपनाया जाएगा
- आवंटन के लिए उपलब्ध सभी औद्योगिक भूखंड औद्योगिक प्राधिकरणों के जीआईएस प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित किए जाएंगे
- ई-नीलामी के माध्यम से भूमि आवंटन के लिए मासिक भूमि आवंटन चक्र अपनाया जाएगा
- योजना बनाकर आवेदनों के सापेक्ष आवंटन के लिए निर्धारित तिथि तक आवेदन प्राप्त होने के बाद 15 दिनों के भीतर बैच-वार भूमि आवंटन किया जाएगा
लखनऊ | उत्तर प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में और सुधार करने के लिए राज्य सरकार सभी औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में भूमि प्रबंधन और समयबद्ध भूमि आवंटन प्रणाली को पूर्ण पारदर्शिता प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। मंत्री, औद्योगिक विकास, सतीश महाना के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने उ. प्र. औद्योगिक निवेश और रोजगार प्रोत्साहन नीति-2017 के अन्तर्गत् विभिन्न श्रेणियों की निवेश परियोजनाओं के लिए भूखंडों के आवंटन के लिए समयसीमा निर्धारित कर दी है।
इस सम्बंध में आज जारी शासनादेश के अनुसार मेगा, मेगा प्लस और सुपर मेगा औद्योगिक परियोजनाओं के लिए निवेशक या उद्यमी से आवेदन प्राप्त होने के बाद भूमि का आवंटन फास्ट-ट्रैक मोड से अधिकतम 15 दिनों में किया जाएगा। इसके अतिरिक्त ई-नीलामी के माध्यम से भूमि आवंटन के लिए मासिक भूमि आवंटन चक्र अपनाया जाएगा, अर्थात् निर्दिष्ट तिथि तक प्राप्त आवेदनों पर आवंटन उस माह की अंतिम तिथि तक कर दिया जाएगा। योजना बनाकर आवेदन मांगे जाने की दशा में निर्धारित तिथि तक आवेदन प्राप्त होने के बाद 15 दिनों के भीतर बैच-वार भूमि आवंटन के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
सभी औद्योगिक विकास प्राधिकरण जीआईएस आधारित एक सुदृढ़ लैण्ड बैंक की स्थापना कर रहे हैं, जिससे सम्भावित निवेशक अपनी पसंद के अनुसार भूमि का चयन पारदर्शी रूप से आॅनलाइन कर सकें।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मेगा, मेगा प्लस एवं सुपर मेगा औद्योगिक इकाइयों हेतु फास्ट-ट्रैक मामलों में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डी.पी.आर.) के आधार पर ही निवेश का आकलन किया जाएगा। इसके लिए रु. 2 करोड़ का न्यून्तम प्रति एकड़ मानदंड निर्धारित किया गया है ताकि निवेशक द्वारा वास्तविक आवश्यकता से अधिक भूमि न प्राप्त की जाए।
यह निर्देश नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा), यू.पी. राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा), लखनऊ औद्योगिक विकास प्राधिकरण (लीडा), गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा), सतहरिया औद्योगिक विकास प्राधिकरण (सीडा) और दिल्ली-मुंबई इण्डस्ट्रियल काॅरिडोर एकीकृत औद्योगिक टाउनशिप ग्रेटर नोएडा लिमिटेड (डीएमआईसी आईआईटीजीएनएल) को प्रेषित किए गए हैं।
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