कैबिनेट का फैसला : इलाहाबाद 443 साल बाद फिर से प्रयागराज


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lucknow | मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इलाहाबाद का नाम बदलकर फिर से प्रयागराज कर दिया गया है। 443 साल बाद इलाहाबाद का नाम बदलकर फिर से प्रयागराज कर दिया गया है।

बैठक के बाद राज्य सरकार के प्रवक्ता स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने संवाददाताओं को बताया कि प्रयागराज नाम रखे जाने का प्रस्ताव कैबिनेट की बैठक में आया, जिसे मंजूरी प्रदान कर दी गई। ऋगवेद, महाभारत और रामायण में प्रयागराज का उल्लेख मिलता है। उन्होंने कहा कि सिर्फ वह ही नहीं, बल्कि समूचे इलाहाबाद की जनता, साधु और संत चाहते थे कि इलाहाबाद को प्रयागराज के नाम से जाना जाए। दो दिन पहले जब मुख्यमंत्री ने कुंभ से संबंधित एक बैठक की अध्यक्षता की थी, तो उन्होंने खुद ही प्रस्ताव किया था कि इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किया जाना चाहिए। सभी साधु संतों ने सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव पर मुहर लगायी थी ।

उल्लेखनीय है कि इलाहाबाद में कुंभ मार्गदर्शक मंडल की बैठक में भी यह मुद्दा आया था। इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किए जाने की मांग अरसे से चल रही थी। राज्यपाल राम नाईक ने भी इसके नाम बदलने पर सहमति जताई थी।

 रामचरित मानस में इसे प्रयागराज ही कहा गया है। इलाहाबाद। संगम के जल से प्राचीन काल में राजाओं का अभिषेक होता था। इस बात का उल्लेख वाल्मीकि रामायण में है। वन जाते समय श्रीराम प्रयाग में भारद्वाज ऋषि के आश्रम पर होते हुए गए थे। भगवान श्रीराम जब श्रृंग्वेरपुर पहुंचे तो वहां प्रयागराज का ही जिक्र आया। सबसे प्राचीन एवं प्रामाणिक पुराण मत्स्य पुराण के 102 अध्याय से लेकर 107 अध्याय तक में इस तीर्थ के महात्म्य का वर्णन है। उसमें लिखा है कि प्रयाग प्रजापति का क्षेत्र है जहां गंगा और यमुना बहती हैं।
अकबरनामा और आईने अकबरी व अन्य मुगलकालीन ऐतिहासिक पुस्तकों से ज्ञात होता है कि अकबर ने सन 1575 के आसपास प्रयागराज में किले की नींव रखी। उसने यहां नया नगर बसाया जिसका नाम उसने इलाहाबाद रखा। उसके पहले तक इसे प्रयागराज के ही नाम से जाना जाता था।


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