पेंशन अदालत कार्यक्रम में पहुंचे रक्षामंत्री राजनाथ सिंह कहा,पेंशनरों से जुड़े सारे काम ऑनलाइन होंगे


लखनऊ |   182 रक्षा पेंशन अदालत में शनिवार सुबह राजनाथ सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरूआत की। इस कार्यक्रम में सैकड़ों की तादात में पेंशनर्स पहुंचें। रक्षा लेखा महा नियंत्रक संजीव मित्तल ने कहा कि 1987 में देश की पहली रक्षा अदालत जालंधर में हुई थी। यह पहला मौका है जब पेंशन अदालत में रक्षा मंत्री आए हैं।

उन्होंने कहा मध्य कमान सेनाध्यक्ष का विशेष योगदान रहा है। यह पेंशनर्स के लिए बेहद महत्वपूर्ण आयोजन है। इसका उद्देश्य पेंशनरों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं से रूबरू होना है। पेंशन को लेकर सुधार किए जा रहे हैं। वेबसाइट और पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। नया सेंट्रल कॉम्प्रिहेंसिव पेंशनर पैकेज सिस्टम भी जल्द लांच किया जाएगा।जिसमें पेंशनरों से जुड़े सारे काम ऑनलाइन होंगे। उन्होंने बताया देश में 32 लाख रक्षा पेंशनर हैं और हर साल 80  से 85  पेंशनर बढ़ जाते हैं। कुल रक्षा बजट का 26 प्रतिशत पेंशनर्स पर खर्च होता है। छोटी जगहों पर कुछ दिक्कतें आती हैं, जिसे सुधारा जा रहा है। इलाहाबाद में पेंशन से जुड़े बैंक, ट्रेज़री आदि संस्थाओं के ट्रेनिंग के लिए भी व्यवस्था की गई है। यह आयोजन पेंशनर्स के लिए लाभकारी सिद्ध होगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भूतपूर्व सैनिकों का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा पहली बार इस कार्यक्रम में कोई रक्षामंत्री आया, शायद यह बात अटपटी लगे, पर मैं इसलिए आ गया कि सेना, नेवी के ऑन ड्यूटी जवानों की तरह भूतपूर्व सैनिकों का सम्मान करता हूं।

उन्होंने कहा रक्षा मंत्री बनने पर सियाचिन गया और वहां देखा जवान विपरीत परिस्थितियों में काम करते हैं। लगातार हौसला बनाए रखकर विपरीत परिस्थिति में डटे रहते हैं। जवानों की दाढ़ी बढ़ी थी तो पता लगा जवान वहां दाढ़ी नहीं बनाते। वहां से लौटने पर जवानों के परिजनों को पत्र लिखकर कहा आप पर नाज है। गौरव की अनुभूति होती है।

उन्होंने कहा भारत और चीन की सीमा पर गया। बुमला चेक पोस्ट गया और वहां जवानों से संवाद किया। राजनीतिक चर्चा में भी मैं जवानों की बात करता हूं। जवानों पर हमें नाज है तो भूतपूर्व सैनिकों पर भी फक्र है। जरूरत पड़ने पर भूतपूर्व सैनिक उसी हौसले से कुछ भी कर गुजरने का माद्दा रखते हैं

उन्होंने कहा डिफेंस अकाउंट डे पर संजीव मित्तल से मिला था। महालेखा नियंत्रक ने बेहतरीन काम किया। इलाहाबाद की टीम को सम्मानित भी किया था। वे बोले देश जिस ऊंचाई पर है, वह जवानों की वजह से है, जो सरहद पर डटे हैं। ये अब्दुल हमीद, कैप्टन मनोज पांडेय की जमीन है। सेना के जवानों के ऋण से मुक्त नहीं हो सकते। उन्होंने कहा जहां भी जाता हूं रिक्रूटमेंट के लिए कैंप लगाने की मांग होती है। यह जानते हुए भी कि यह खतरे से कम नहीं।

उन्होंने कहा भारत की सीमाओं पर आंख उठाकर जब कोई देखता है तो लोगों का राष्ट्रीय स्वाभिमान जाग जाता है और इसी से वह सेना में भर्ती होने के लिए आतुर रहते हैं। देश की सुरक्षा के लिए आपने जो किया है, उसे भूल नहीं सकते। OROP का मामला सरकार बनने पर निस्तारित किया गया।

रक्षा पेंशन में एक्सेप्टेंस से लेकर डिसबर्समेंट तक जटिल प्रोसेस होता है। लेकिन कोशिश रहती है कि पेंशन लेकर टेंशन न हो और वह समय पर सैंक्शन हो जाए। पेंशन समस्या के लिए अधिकारी से मिलने की जरूरत नहीं कॉल सेंटर की व्यवस्था की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व सैनिक देशवासियों के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं।


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