
लखनऊ। नोट बंदी के बाद से लड़खडाया रियल स्टेट का कारोबार अभी तक सम्हल नही पाया है। इसका जीता जागता उदाहरण उत्तरप्रदेश आवास विकास की कई आवासीय परियोजनाएं है। उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद ने 7 शहरों की अपनी 11 योजनाओं में फ्लैट की कीमतें फ्रीज कर दी हैं। इन्हें 6 महीने के लिए फ्री किया गया है। इस अवधि में आवास विकास अपने फ्लैट पुरानी दरों पर ही बेचेगा। फ्लैटों की बिक्री न होने की वजह से आवास विकास ने यह निर्णय लिया है। बिक्री बढ़ने पर परिषद 6 महीने के बाद इनकी कीमतें बढ़ाएगा।
आवास विकास की विभिन्न योजनाओं में करीब 10000 फ्लैट खाली पड़े हैं। सबसे ज्यादा फ्लैट गाजियाबाद, मेरठ, लखनऊ, कानपुर, आगरा, खटीमा तथा मुरादाबाद में खाली हैं। तमाम प्रयासों के बावजूद परिषद इन फ्लैटों को बेचने में नाकाम रही है। फ्लैटों में परिषद का अरबों रुपए फंस गया है। इसी वजह से उसने नए फ्लैटों के निर्माण पर रोक लगा दी है। केवल प्रधानमंत्री आवास योजना के ही मकान बनाए जा रहे हैं। आवास विकास सूत्रों का कहना है कि पिछली सपा सरकार में इंजीनियरों व अधिकारियों ने कमीशनबाजी के लिए प्रदेश के विभिन्न शहरों में बेतहाशा फ्लैट बनाएं। फ्लैटों के लिए डिमांड सर्वे तक नहीं कराया गया। बिना जरूरत के हजारों फ्लैट बना दिए। जो अब अधिकारियों के गले की फांस बन गया है।
परिषद ने खाली फ्लैटों को बेचने के लिए तमाम प्रयास किए। इसके लिए पहले आओ पहले पाओ की स्कीम चलाई। मेला लगाया। फिर भी फ्लैट नहीं बिक रहे हैं। आवास विकास परिषद ने गंगा यमुना हिंडन फ्लैट्स सिद्धार्थ विहार योजना गाजियाबाद–शिखर एंक्लेव फ्लैट्स वसुंधरा योजना गाजियाबाद–वृंदावन योजना संख्या 4 फ्लैट्स ,लखनऊ–वृंदावन योजना संख्या 3 फ्लैट्स, लखनऊ—डॉ आंबेडकर पुरम योजना संख्या तीन सेक्टर ई, कानपुर–सिकंदरा योजना, आगरा–योजना संख्या 1, खटीमा–मझोला योजना संख्या 4 पार्ट 2, मुरादाबाद–जागृति विहार विस्तार योजना संख्या 11 सेक्टर 3, 3ए व 4, मेरठ–हरदोई रोड आम्रपाली योजना, लखनऊ–दिल्ली सहारनपुर मार्ग योजना, मंडोला विहार, गाजियाबाद को पुराने दामों में बेचने का निर्णय लिया है।
इस सम्बंध में धर्मेंद्र वर्मा, वित्त नियंत्रक, आवास विकास परिषद ने बताया कि जिन योजनाओं में फ्लैटों की बिक्री नहीं हो रही थी। लंबे समय से खाली पड़ी थी। उन्हीं में कीमते फ्रीज की गई है। यह निर्णय सभी अधिकारियों के साथ हुई बैठक में लिया गया है।
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