
नई दिल्ली. यूपी के डिप्टी सीएम केशव मौर्या योगी सरकार से मोदी सरकार में ट्रांसफर हो सकते हैं. बसपा सुप्रीमो मायावती को रोकने के लिए मौर्या को केन्द्र में भेजा जा सकता है. केशव प्रसाद मौर्या फूलपुर से सांसद हैं. उत्तर प्रदेश सरकार में डिप्टी सीएम बने हुए उन्हें 4 महीने हो चुके हैं. दो महीने के महीने के भीतर उन्हें विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना ज़रूरी है. अब दिक्कत यह है कि केशव अगर विधानसभा जाते हैं तो उन्हें फूलपुर संसदीय सीट छोड़नी पड़ेगी. इस संसदीय सीट से मायावती संयुक्त विपक्ष की उम्मीदवार हो सकती हैं. इसके अलावा चर्चा यह भी है कि केशव विधानसभा चुनाव लड़ेंगे तो भी विपक्ष मायावती को उनके खिलाफ एकजुट होकर उतारेगा. ऐसे में अगर केशव हार जाते हैं तो इससे भारतीय जनता पार्टी की किरकिरी होगी.
फूलपुर सीट से 1996 में बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम चुनाव लड़ चुके हैं. इस सीट पर दलित और पिछड़े वर्ग के साथ-साथ अल्पसंख्यक वोटों की भी बड़ी संख्या है. यह ऐसी सीट है जिस पर मायावती की राह आसान हो सकती है. 2019 में देश का संसदीय चुनाव होना है. ऐसे में भारतीय जनता पार्टी किसी भी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहती है. भारतीय जनता पार्टी को यह आभास है कि मायावती को लोकसभा या विधानसभा का चुनाव जिताने के लिए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस भी बहुजन समाज पार्टी के समर्थन में खड़ी हो जायेंगी. स्थितियां ऐसी बनीं तो भाजपा के लिए राह बहुत मुश्किल हो जायेगी. फिलहाल केन्द्र और उत्तर प्रदेश दोनों जगहों पर भारतीय जनता पार्टी के पास प्रचंड बहुमत है. ऐसे में भारतीय जनता पार्टी किसी भी तरह का रिस्क लेकर अपनी किरकिरी कराने के मूड में नहीं है. केशव मौर्या को केन्द्र में मंत्री बनाकर उन्हें यूपी में चुनाव लड़ने से रोका जा सकता है.
https://rashtriyadinmaan.com
