यूपी की सूनी मंडियों में लक्ष्य पूर्ति का तानाशाही आदेश , अधिकारी हैरान ,परेशान


निदेशक का लक्ष्य पूर्ति का तुगलकी आदेश

लखनऊ । केंद्र सरकार द्वारा गत 5 जून को जारी अध्यादेश के बाद मंडियों में खाद्यान्न की आवक शून्य हो गयी है, केवल फल सब्ज़ी की आवक से यूपी की मंडियों में कुछ रौनक है जो 8-9 बजते बजते ख़त्म हो जाती है उसके बाद मंडिया वीरान हो जाती है. फल सब्ज़ी की भी 45 जिन्सों पर सरकार ने गत 21 मई को मण्डी शुल्क ख़त्म कर दिया है. इन सारी स्थितियों की भली भांति जानकारी रखते हुए भी मण्डी निदेशक ने बोर्ड की हालिया बैठक में मात्र आधा प्रतिशत मण्डी शुल्क कम करने का प्रस्ताव पारित कराया और आधा प्रतिशत सेस बरकरार रखा यानि 1.5 प्रतिशत मण्डी शुल्क और 0.5 प्रतिशत विकास सेस, कुल दो प्रतिशत शुल्क का भार मण्डी में व्यापार करने वाले व्यापारी पर पड़ेगा और मण्डी के बाहर के व्यापारी शुल्क मुक्त. ऐसे परिवेश में मण्डी में कोई व्यापारी आने को तैयार नहीं है फिर भी निदेशक ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए सभी मंडियों को गत वर्ष की वसूली के बराबर का लक्ष्य दे दिया है.

 

मज़े की बात यह है कि केंद्र के आदेश के बाद प्रदेश की 31मण्डियां बिलकुल शून्य हो गयी है जिनमें मण्डी स्थल का निर्माण नहीं हुआ है लेकिन उन्हें भी लक्ष्य पूरा करना है. मण्डी स्थल के बाहर अन्य क्षेत्रों से गत वर्ष मिला मण्डी शुल्क अब नहीं मिलेगा पर लक्ष्य पूरा करना है. केंद्र के आदेश के बाद अधिकांश मंडलों झाँसी, आगरा, कानपुर, बरेली, लखनऊ आदि में व्यापारी धरना और हड़ताल पर है, आवक शून्य है, कर्मचारी हतप्रभ है उस पर निदेशक का लक्ष्य पूर्ति का तुगलकी आदेश रही सही कसर पूरी कर रहा है. कंगाली में आटा गीला को सही साबित करते हुए जहाँ मंडियों से किराये के वाहन भी हटा दिए गये है वहीं निर्माण हेतु 400-500 करोड़ का फंड बोर्ड की बैठक में प्राविधान कराने की बात भी पता चली है. करेला और नीमचढ़ा की कहावत चरितार्थ करते हुए निदेशक के सचिवों और उपनिदेशकों द्वारा दिए गये एक प्रतिशत मण्डी शुल्क और फल सब्ज़ी की 45 जिंसों पर छूट की अधिसूचना निरस्त करने के सुझाव को दरकिनार कर जारी किये गये लक्ष्य पूर्ती के इस आदेश की चहुँ ओर आलोचना हो रही है.

 

 

 


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