माप पुस्तिका, कार्यादेष जमा कराये गये
लखनऊ:|उ0प्र0 डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ द्वारा घोषित संघर्ष कार्यक्रम के क्रम में प्रदेश के समस्त जनपदों में डिप्लोमा इंजीनियर्स का कार्य बहिष्कार का कार्यक्रम पूरी ऊर्जा के साथ जारी है। सभी जनपदों में डिप्लोमा इंजीनियर्स द्वारा बैठके कर बड़े पैमाने पर माप पुस्तिकाऐं, कार्यादेश आदि शासकीय दस्तावेज जमा कराने का काम तेजी से चल रहा है, नतीजन समस्त विभागों में कामकाज ठप हो चुके हैं। प्रदेश के समस्त सदस्यों द्वारा हड़ताल पर जाने हेतु हड़ताल घोषणा पत्र भरे जा चुके हैं। प्रदेश भर में आयोजित बैठकों में सदस्यों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि हम लोग विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से सरकार का ध्यानाकर्षण करा चुके हैं, परन्तु सरकार द्वारा हठधर्मिता तथा असमानता की नीति अपनायी जा रही है। शासनादेश निर्गत न होने के कारण लक्ष्मण मेला मैदान लखनऊ में 15-17 फरवरी तक क्रमिक अनशन का ध्यानाकर्षण कार्यक्रम किया गया था, फिर भी माँगे न माने जाने पर 18 से 24 फरवरी तक कार्य बहिष्कार कर दिया गया है, 24 फरवरी तक निर्णय न होने की दशा में 25 फरवरी 2016 से समस्त सदस्य हड़ताल पर चले जायेंगे। यह सूचना महासचिव इं0 सुधीर पंवार ने दिया।
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डिप्लोमा इंजीनियर्स की समस्याओं के समाधान हेतु मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन द्वारा प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग की अध्यक्षता में समिति गठित की, समिति द्वारा बैठक कर समस्याओं को जायज मानते हुए अपनी संस्तुति दी। उच्च स्तरीय समिति की संस्तुति मार्च 2015 से लम्बित है, उन संस्तुतियों को लागू कराने हेतु ही डिप्लोमा इंजीनियर्स संघर्षरत है। जूनियर इंजीनियर्स के वेतनमान की विसंगति को दूर कर प्रारम्भिक वेतनमान पीबी-2 वेतन बैण्ड 9300-34800, वेतन ग्रेड रूपये 4800/- प्रदान करते हुए इस संवर्ग को राजपत्रित घोषित किया जाए। जूनियर इंजीनियर्स को सेवा प्राविधानित अवधि 07 वर्ष, 14 वर्ष और 20 वर्ष की सेवा क्रमशः सहायक अभियन्ता, अधिशासी अभियन्ता व अधीक्षण अभियन्ता पदों पर तीन पदोन्नति वेतनमान दिये जाए। निगमों में कराये जाने वाले कार्यों के विरूद्ध देय सेन्टेज का भुगतान कराया जाए अन्यथा अन्य प्रदेशों की भांति कार्मिकों के वेतन भत्ते का भुगतान राजकीय कोष से किया जाय तथा छठे वेतन आयोग के एरियर का भुगतान भी कराया जाए।
उ0प्र0 डिप्लेामा इंजीनियर्स महासंघ लगातार मुख्यमंत्री/मुख्य सचिव स्तर पर वार्ता की माँग कर रहा है। तमाम प्रतिकूल परिस्थितियों में भी 24 घण्टे की सेवाएं देते हुए शासन और सरकार की महत्वाकंाक्षी योजनाओं को धरातल पर उतारने का कार्य यही संवर्ग करता है। अनेकों संवर्ग जिनका वेतनमान जूनियर इंजीनियर्स से कम या बराबर था उसमें वृद्धि करते हुए उन्हें अधिक वेतनमान प्रदान कर दिया गया लेकिन जूनियर इंजीनियर्स संवर्ग की लगातार उपेक्षा की जा रही है, इससे संवर्ग में नाराजगी है। लेकिन सरकार का सकारात्मक रूख न मिलने के कारण महासंघ के पास हड़ताल के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं बचा है,।
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