संस्थान के लिए धन की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी
लखनऊ: मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश ग्रामीण आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान, सैफई इटावा के चिकित्सकों का आवाह्न किया है कि वे गरीबों एवं असहायों की सेवा करके संस्थान का नाम रोशन करें। उन्होंने कहा कि इस संस्थान के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी। इस संस्थान के लिए जितने भी धन की आवश्यकता होगी, उसके लिए बजट उपलब्ध कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री आज ग्रामीण आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जब संस्थान में अच्छे डाॅक्टर होंगे, तभी यह संस्थान लोगों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध करा सकेगा। उन्होंने यहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को मेहनत से पढ़ाई करने की सलाह देते हुए कहा कि अच्छे छात्रों के निकलने से ही संस्था को ख्याति मिलती है और अन्य संस्थानों की तरह जाना जाता है। उन्होंने कहा कि संस्थान की लगातार तरक्की से नेताजी का सपना साकार हो रहा है।
इस अवसर पर राजनैतिक पेंशन मंत्री श्री राजेन्द्र चैधरी, मुख्य सचिव श्री आलोक रंजन सहित संस्थान के निदेशक डाॅ0 (ब्रिगेडियर) टी0 प्रभाकर, चिकित्सकगण सहित अन्य गणमान्य नागरिक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि आज से 10 साल पहले इस संस्थान की नींव रखी गई थी। इस संस्थान की शुरुआत एक मल्टीस्पेशियलिटी हाॅस्पिटल के रूप में हुई थी। यह मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल आज आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान के रूप में विकसित हो चुका है।
उच्च कोटि की चिकित्सा शिक्षा सुविधा उपलब्ध कराने हेतु संस्थान में एक 500 बिस्तरों वाले सुपर स्पेशिलिटी हाॅस्पिटल का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। अगले तीन साल में इसका निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा और क्षेत्र की जनता को विशिष्ट चिकित्सा सुविधा मिलने लगेगी। रोड एक्सीडेंट, आग लगने आदि से गम्भीर रूप से घायल व्यक्तियों के इलाज के लिए संस्थान में 150 बेड के ट्राॅमा सेण्टर का शिलान्यास वर्ष 2013 में किया गया था, जो अब लगभग पूरा हो गया है और शीघ्र ही कार्य करने लगेगा। मरीजों के तीमारदारों के ठहरने के लिए एक रैन बसेरा भी बनाया जा रहा है, जो शीघ्र चालू कर दिया जाएगा।
संस्थान में नर्सिंग स्टाफ की बढ़ती हुई संख्या को देखते हुए 300 बेड के नर्सिंग हाॅस्टल के निर्माण कार्य को भी शासन द्वारा मंजूरी प्रदान की गई है। शुरुआत में संस्थान में एम0बी0बी0एस0 की पढ़ाई की 100 सीटें थीं, जिनकी संख्या अब बढ़कर 150 हो गई है। पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए भी 50 सीटें एम0सी0आई0 द्वारा मंजूर की गई हैं।
इस संस्थान में वर्ष 2012 से पैरामेडिकल एवं नर्सिंग कालेज में पढ़ाई शुरू कराई गई। इस शैक्षिक सत्र से प्रदेश के पहले सरकारी फार्मेसी कालेज की भी स्थापना कर दी गई है और उसमें छात्रों का प्रथम बैच दाखिल हो चुका है। संस्थान का अस्पताल सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है। इस संस्थान में आस-पास के 10-12 जिलों के मरीज आ रहे हैं। इसके अलावा, पड़ोस के राज्यों के मरीज भी चिकित्सा सुविधाओं की वजह से यहां नियमित रूप से इलाज कराने आते हैं।
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