मुख्यमंत्री केजरीवाल ने दिया फूड कमिश्नर को तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्देश


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नई दिल्ली  |  खाद्य मंत्री इमरान हुसैन की रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने फूड कमिश्नर को तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्देश दिया। साथ ही इसकी जानकारी उपराज्यपाल को भी दे दी है। दरअसल, मंगलवार देर शाम नांगलोई की राशन की दुकान पर छापेमारी के दौरान राशन बिक्री में अनियमितता पाई गई थी। रिपोर्ट में इस तरह की गड़बड़ियों की पूरी जिम्मेदारी फूड कमिश्नर पर डाली गई है।

इमरान हुसैन ने बताया कि स्थानीय लोगों की शिकायत पर मंगलवार शाम नांगलोई इलाके की एक सरकारी राशन की दुकान पर छापेमारी की गई। 15 नवंबर के बाद इस दुकान के लिए 152 क्विंटल गेहूं और 38 क्विंटल चावल जारी किया गया था। अगले महीने की पहले पखवाड़े में इसे लाभार्थियों में बांटना था। छापेमारी के दौरान दुकान में राशन नहीं मिला। स्थानीय निवासियों ने बताया कि इस महीने कोई राशन दुकान पर उतरा ही नहीं।

हुसैन के मुताबिक राशन घोटाले का रोकने, छापेमारी करने की जिम्मेदारी फूड कमिश्नर की है।  इसकी पूरी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को भेज दी है। इसके आधार पर मुख्यमंत्री ने तत्काल प्रभाव से फूड कमिश्नर को हटाने का निर्देश मुख्य सचिव को दिया है। उन्होंने उपराज्यपाल से कहा है कि फूड कमिश्नर को हटा देना चाहिए।

इमरान हुसैन ने बताया कि यह सिर्फ एक दुकान का घोटाला है। दिल्ली में करीब 2200 राशन दुकानें हैं। सबको मिलाकर देखा जाए तो घोटाले का परिमाण बहुत बड़ा हो जाता है। यही वजह है कि सरकार डोर स्टेप डिलीवरी स्कीम की बात कर रही है, ताकि इस तरह के घोटालों को रोका जा सके।

दो बार यह मसला कैबिनेट में भी आया। लेकिन विभागीय अधिकारी कोई काम नहीं नहीं कर रहे। अब इन नए घोटाले के मामले में अगर उपराज्यपाल फूड कमिश्नर को नहीं हटाते तो पता चल जाएगा कि इस मामले में किस-किस की मिलीभगत है।

उत्तर पूर्वी दिल्ली लोक सभा प्रभारी दिलीप पांडेय ने आरोप लगाया कि उपराज्यपाल और भाजपा के साथ मिलीभगत कर राशन माफिया दिल्ली के गरीब लोगों के हक का राशन खा रहे हैं। उन्होंने सवाल भी किया कि अगर उप-राज्यपाल साहब पाक-साफ हैं और राशन में हो रहे इस भ्रष्टाचार से उनका कोई लेना-देना नहीं है तो इतने बड़े भ्रष्टाचार के बाद भी क्यों फूड कमिश्नर को बर्खास्त नहीं कर रहे हैं।

पांडेय ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के निर्देश व इतने तथ्यों के बाद भी अगर उपराज्यपाल फूड कमिश्नर को नहीं हटाते हैं तो ये बात साबित हो जाएगा कि राशन की कालाबाजारी उपराज्यपाल और फूड कमिश्नर की भी जानकारी में थी। इस कालाबाजारी से आने वाली कमाई का एक बड़ा हिस्सा उपराज्यपाल साहब को भी जाता है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की भी मांग की।


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