लखनऊ । विद्युत अभियन्ता संघ के अध्यक्ष इं.आर.के. सिंह तथा महासचिव इं.डी.सी. दीक्षित ने बताया कि 31 मार्च 2014 तक 1.6 विद्युत उपभोक्ता पंजीकृत हुए जिसे मार्च 2017 तक 2.5 करोड़ करने का लक्ष्य है, विगत 04 वर्षो में 132 के.वी., 220 के.वी., 400 के.वी.एवं 765 के.वी. के कुल 100 से अधिक पारेषण उपकेन्द्रों एवं सम्बन्धित लाइनों की स्थापना की जा रही है। इसी प्रकार 600 से अधिक विद्युत वितरण उपकेन्द्रों की स्थापना होनी है, 7280 मे.वा. क्षमता की विद्युत उत्पादन इकाईयां लगायी जानी हैं।
इं.डी.सी0. दीक्षित ने इस सम्बन्ध में एक पत्र मुख्यमंत्री को लिखा है। वर्ष 1999-2000 तक पूर्ववर्ती राज्य विद्युत परिषद में लगभग 1 लाख कार्मिक कार्यरत थे जो अब मात्र 40 हजार रह गये हैं। इसके विपरीत विद्युत उपभोक्ताओं की संख्या तथा विद्युत उपकेन्द्रों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है, कई नई विद्युत उत्पादन मशीनें लगाई गयी हैं। उपभोक्ता संख्या, विद्युत उपकेन्द्रों एवं विद्युत उत्पादन इकाईयों में वृद्धि एवं उनके संचालन हेतु पा.का.लि., पारेषण निगम एवं उत्पादन निगम में अभियन्ताओं एव कर्मचारियों के आवश्यक पदों के सापेक्ष आवश्यकता से कम नये पदों के सृजन का प्रस्ताव ऊर्जा अनुभाग की ओर से पे्रषित किया गया है लेकिन उसे आज तक स्वीकृत नहीं किया गया। पत्र में ऊर्जा निगमों द्वारा पे्रषित प्रस्ताव अनुसार मुख्य अभियन्ता, अधीक्षण अभियन्ता, अधिशासी अभियन्ता, सहायक अभियन्ता एवं अधीनस्थ कार्मिकों के पदों के सृजन की स्वीकृति की मांग की गयी है।
उन्होंने बताया कि पावर कारपोरेशन में नवसृजित खण्डों के विरूद्ध अधिशासी अभियन्ताओं के, पारेषण निगम में नये उपकेन्द्रों के विरूद्ध सृजित पदों तथा उत्पादन निगम में नई इकाईयों के संचालन हेतु सृजित पदों की स्वीकृति लम्बे समय से लम्बित है जिससे इन निगमों में अभियन्ताओं की पदोन्नतियां नही हो रही है, इस कारण इन निगमों का सुचारू संचालन प्रभावित हो रहा है एवं बिना पदोन्नति पाये अभियन्ताओं में रोष एवं कुण्ठा व्याप्त हैं। उन्होने इन पदों के सृजन की लम्बित स्वीकृति तत्काल प्रदान करने की मांग की है।
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