सर जार्ज एवरेस्ट ने मसूरी के हाथीपांव स्थित अपने जिस आवास और आब्जरवेटरी से चोटियों का सर्वे करने में सालों बिताए थे, अब उसे उत्तराखंड का सिरमौर बनाने की तैयारी है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) यहां म्यूजियम खोलना चाहता है। इसके लिए डीएम को प्रस्ताव भेजा जा रहा है।
अभी तक यह पर्यटन विभाग के पास है। इसी के साथ एक लाज भी खुला है।
धरोहर संरक्षित करने की पहल
पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारियों का मानना है कि म्यूजियम के माध्यम से यहां बाहर के पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकेगा। साथ ही, पुरातात्विक न होने के बावजूद ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित किया जाना संभव होगा।
बता दें कि सर जार्ज एवरेस्ट के पास ग्रेट ट्रिगनोमैट्रिकल सर्वे के सुपरिंटेंडेंट का भी दायित्व था, जिसे उन्होंने जिस एक्यूरेसी के साथ अंजाम दिया, आज भी उसकी मिसाल दी जाती है। �
1830 में दून में सर्वेयर जनरल आफ इंडिया रहे जार्ज
सर जार्ज एवरेस्ट 1830 में देहरादून में सर्वेयर जनरल आफ इंडिया (एसजीआई) रहे। इस दौरान उन्होंने सर्वे के काम को तेजी से आगे बढ़ाया। उनके 25 साल के योगदान को बहुमूल्य माना जाता है।
इन्ही के नाम पर एवरेस्ट का नाम
देश की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट का नाम भी सर जार्ज एवरेस्ट के नाम पर ही पड़ा है। रायल एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी ने 1848 में उनका यह सम्मान उनके सर्वे में योगदान के लिए किया था।
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