जीडीए की जांच में खुल सकते हैं कई और घपले, अधिकारियों व बाबुओं में हड़कंप


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lucknow |  मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार के निर्देश पर जीडीए में वर्ष 2008 के दौरान बाजार भाव से दोगुनी दर पर विद्युत वायर की खरीद की जांच से प्राधिकरण के कई और घपले खुल सकते हैं। इनमें मधुबन बापूधाम में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से लेकर इंजीनियरिंग विभाग के कई काम हैं। मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार जीडीए बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं। उनके इस आदेश से उस दौरान में जीडीए में तैनात इंजीनियरिंग व वित्त विभाग के अधिकारियों व बाबुओं में हड़कंप मचा हुआ है।

एक अधिकारी का कहना है कि बसपा शासन काल के टेंडरों की जांच हो तो कई और घपले सामने आ जाएंगे। कमीशन के खेल में यहां सीवर ट्रीटमेंट प्लांट और बिजली के समान पर 90 करोड़र्ग्च किए गए। इस मामले की जांच हुई और तत्कालीन वित्त नियंत्रक बीएस चौधरी का निलंबन किया गया था। अरबों रुपये खर्च कर भी मधुबन-बापूधाम योजना परवान नहीं चढ़ सकी। इसके अलावा ठाकुरद्वारा फ्लाई ओवर की चौड़ाई पर कई बार सवाल उठे हैं। यहां कई दुर्घटना हो गई हैं। प्राधिकरण में कामकाज को ऑनलाइन करने व ऑनलाइन एप्लीकेशन के नाम पर पैसा खर्च किया गया और अब ये एप्लीकेशन बंद हैं।

जीडीए में बीते सालों में एक के बाद एक कई विकास प्रोजेक्ट शुरू हुए। एक तरफ जहां विकास प्रोजेक्ट पर काम हो रहा था वहीं दूसरी तरफ परियोजनाओं में धांधली की बातें सामने आ रही थीं। विपक्षी दलों ने भ्रष्टाचार की शिकायतें भी शासन तक की। इसमें मुख्य रूप से इंजीनियरिंग विभाग के प्रोजेक्ट में सबसे बड़ा टेंडर यूपी गेट से राजनगर एक्सटेंशन तक बन रहे एलिवेटेड रोड का 916 करोड़ रुपये और सबसे छोटा प्रोजेक्ट 54 लाख रुपये का है। मधुबन-बापूधाम योजना में फ्लैटों व सड़क निर्माण, आरडीसी में सुंदरीकरण समेत तमाम प्रोजेक्ट की जांच हो सकती है।

जीडीए इसी साल अप्रैल से कैग टीम जीडीए के लेनदेन व कामकाज की जांच कर रही है। कैग टीम ने प्रमुख सचिव (आवास) की मौजूदगी में 8 अगस्त को लखनऊ में जीडीए अधिकारियों के साथ बैठक कर अपत्तियों पर जवाब मांगा था। जीडीए अधिकारियों के जवाब देने के बाद अब कैग टीम में अपत्तियों की अपनी रिपोर्ट विधानसभा कमेटी के सामने प्रस्तुत करनी है। ऐसे में जीडीए में मंडलायुक्त ने साल 2008 में बाजार दर से दोगुने दर पर खरीदी वायर और अतिरिक्त विद्युत सामान की जांच के आदेश दिए है। अब कैग टीम एक बार फिर इन फाइलों को जीडीए अधिकारियों से तलब कर सकती है। कैग टीम जीडीए से विभिन्न विभागों की करीब 1400 फाइलों की कॉपी ले जा चुकी है।


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