जीडीए, एलडीए और केडीए के फ्लैट ना बिकने से प्राधिकरणों की हालत खस्ता, कमाई घट कर आधी हुई


आवास विकास परिषद और विकास प्राधिकरणों की घटती हुई कमाई पर शासन ने चिंता जताई है। विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्षों को निर्देश दिया गया है कि वह आय बढ़ाने के लिए नित नए प्रयास करें। नई योजनाएं लोगों की जेब देखकर लाई जाएं। खासकर ईडब्ल्यूएस, एलआईजी और मिनी एमआईजी मकान बनाने पर ध्यान दिया जाए। इन मकानों की कीमतें इतनी रखी जाएं कि इसके खरीददार हाथों-हाथ मिल जाए। कम मुनाफे पर भी ऐसे मकानों को बनाकर बेचा जा सकता है जिससे आय में वृद्धि हो सके।

विकास प्राधिकरण और आवास विकास प्राधिरण के मकानों के न बिक पाने का एक कारण मंदी को भी माना जा रहा है। विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्षों का तर्क दिया है कि मकान लेने वालों में सरकारी के साथ निजी क्षेत्र में काम करने वालों की संख्या काफी होती है। मंदी के चलते ऐसे लोग कम आ रहे हैं।

किस शहर में कितनी कमाई

शहर                कमाई-पिछले वर्ष    कमाई-इस वर्ष

आवास विकास    757.64 करोड़    457.20 करोड़

गाजियाबाद       556.57 करोड़    271.16 करोड़

लखनऊ               855.97 करोड़    376.17 करोड़

कानपुर             458.93 करोड़    315.92 करोड़

 

अयोध्या             20.16 करोड़    12.46 करोड़
चित्रकूट               25.65 लाख    08.86 लाख

गोरखपुर            45.26 करोड    81.01  करोड़

मथुरा                  77.24 करोड़    54.94 करोड़
मेरठ                      112.99 करोड    80.52 करोड़
मुरादाबाद                  58.59 करोड़    45.85 करोड़
प्रयागराज                  120.69 करोड़    60.84 करोड़
रायबरेली                    12.91 करोड़    07.03 करोड़


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