
नई दिल्ली. चालू वित्त वर्ष के दूसरी तिमाही यानी जुलाई-सितंबर माह के लिए सकल घरलू उत्पाद (GDP Growth Rate) घटकर 4.5 फीसदी के स्तर पर आ गया है. इसके पहले की तिमाही में यह जीडीपी दर 5 फीसदी के स्तर पर था. यह पिछली 26 तिमाही में सबसे कम है. पहली तिमाही में विकास दर 5 फीसदी पर आ गई है. वहीं, पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 7 फीसदी दर्ज की गई थी.
सितंबर तिमाही के लिए ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) भी घटकर 4.3 फीसदी के स्तर पर था. पहली तिमाही में यह 4.9 फीसदी के स्तर पर था. एक साल पहले सामान अवधि में यह 6.9 फीसदी था.
गौरतलब है कि इसके पहले इंडिया रेटिंग्स, क्रिसिल समेत कई एजेंसियों ने सितंबर तिमाही में अर्थव्यवस्था की विकास दर में गिरावट का अनुमान जताया था. इन रेटिंग एजेंसियों का मानना था कि, सुस्त डिमांड, निवेश में कमी और लिक्विडिटी की दिक्कत के चलते आर्थिक सुस्ती और गहरा सकती है. इंडिया रेटिंग्स और क्रिसिल ने सितंबर तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 4.7 फीसदी रहने का अनुमान जताया था.
रॉयटर्स ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक एक बार फिर रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती कर सकता है. तीन से पांच दिसंबर चलने वाली MPC बैठक में रेपो रेट को घटाकर 4.90 फीसदी पर की जा सकती है. सर्वे में शामिल अधिकतर अर्थशास्त्रियों का कहना है कि घरेलू कर्ज की धीमी रफ्तार और कंपनियों के घटते मुनाफे की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था को रफ्तार पकड़ने में समय लगेगा.
जीडीपी किसी ख़ास अवधि के दौरान वस्तु और सेवाओं के उत्पादन की कुल क़ीमत है. भारत में जीडीपी की गणना हर तीसरे महीने यानी तिमाही आधार पर होती है. ध्यान देने वाली बात ये है कि ये उत्पादन या सेवाएं देश के भीतर ही होनी चाहिए.
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