गाजियाबाद एनकाउंटर केस: 20 साल बाद आया काेर्ट का फैसला, 4 पुलिसवालों को उम्रकैद


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लखनऊ. 1996 में गाजियाबाद में किए गए एनकाउंट मामले में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने बुधवार को फैसला सुनाया. कोर्ट ने एनकाउंटर को फर्जी मानते हुए 4 दोषी पुलिसवालों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. बता दें कि 20 साल पहले 8 नवंबर 1996 में गाजियाबाद में भोजपुर पुलिस ने बदमाश बताकर 4 युवकों का एनकाउंटर किया था. दोषियों में एक पूर्व डिप्टी एसपी व एक पूर्व सब इंस्पेक्टर और दो सिपाही शामिल हैं.

8 नवंबर 1996 को भोजपुर पुलिस ने चार युवकों को एनकाउंटर में मार गिराने का दावा किया था. मारे गए युवक मोदीनगर की विजयनगर कालोनी के जलालुद्दीन, प्रवेश, जसवीर और अशोक थे, जो फैक्ट्री में नौकरी और मजदूरी करते थे. मृतकों के परिजनों ने इसे फर्जी मुठभेड़ बताते हुए विरोध प्रदर्शन किया था और सीबीआई जांच की मांग की थी. सात अप्रैल 1997 को सीबीआई को इसकी जांच सौंपी गई थी. 10 सितंबर 2001 को सीबीआई ने कोर्ट में चार्जशीट पेश की थी, जिसमें तत्कालीन भोजपुर एसओ लाल सिंह, एसआई जोगेंद्र, कांस्टेबल सुभाष, सूर्यभान और रणवीर को आईपीसी की धारा 302, 149, 193 और 201 के तहत आरोपी बनाया था.

केस की सुनवाई के दौरान 27 अप्रैल 2004 को रणवीर की मृत्यु हो गई थी. बाकी चारों पुलिसकर्मियों को कोर्ट ने दोषी करार दिया है. जमानत पर चल रहे लाल सिंह, जोगेंद्र और सुभाष कोर्ट में उपस्थित थे, जिन्हें हिरासत में लेकर डासना जेल भेज दिया गया, जबकि सूर्यभान इलाहाबाद गया हुआ था, वह उपस्थित नहीं हो सका. उसके अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि वह गाजियाबाद के लिए रवाना हो गया है. ट्रेन का एक्सीडेंट होने की वजह से उसे देर हो गई है.

 

विशेष सीबीआई कोर्ट ने 226 पेज के फैसले में सीबीआई की थ्योरी को सही माना कि भोजपुर फर्जी एनकाउंटर में मारे गए चारों युवक निहत्थे थे. पुलिस उन्हें चाय की दुकान से जीप में उठाकर ले गई थी. आउट ऑफ टर्न प्रमोशन पाने के लिए पुलिसकर्मियों ने दो युवकों को पुलिया पर और दो को ईंख के खेत में मार गिराया था. मुठभेड़ साबित करने के लिए उनके पास तमंचे रख दिए थे और उनसे 16 राउंड फायर किए जाने का दावा किया था. इस मामले में 112 लोगों की गवाही हुई. दोषी करार दिया गया तत्कालीन भोजपुर एसओ लाल सिंह डिप्टी एसपी से रिटायर्ड हो चुका है. वह विजयनगर के प्रताप विहार में रहता है. एसआई जोगेंद्र अच्छनेरा आगरा का रहने वाला है, इसने करीब छह माह पहले वीआरएस ले लिया है.

कांस्टेबल सुभाष इंचौली मेरठ का रहने वाला है, जबकि सूर्यभान सराय इनायत इलाहाबाद का. सूर्यभान बांदा में तैनात है. सीबीआई लोक अभियोजक राजन दहिया ने बताया कि सुनवाई के दौरान जोगेंद्र गायब हो गया था, बाद में उसकी अलग से सुनवाई हुई. उन्होंने बताया कि पुलिस ने मुठभेड़ को सही बताने वाले करीब 35 लोगों के एफिडेविट पेश किए थे. इनमें से कुछ तो कोर्ट में आए ही नहीं, जो लोग आए उनमें से अधिकांश ने बताया कि पुलिसकर्मियों ने एफिडेविट पर उनसे हस्ताक्षर कराए थे, यानी एफिडेविट भी फर्जी थे. पुलिस ने मुठभेड़ में युवकों की तरफ से तमंचे से 16 गोलियां चलना बताया था, लेकिन एक भी पुलिसकर्मी घायल नहीं हुआ था. इसकी जांच तत्कालीन सीओ हापुड़ ने की थी. उन्होंने केस में फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी, लेकिन सीबीआई जांच में पुलिस का फर्जीवाड़ा खुल गया.


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