जीडीए उपाध्यक्ष ने अपर सचिव की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई-जीडीए अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत की होगी जांच
lucknow | गाजियाबादइंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी (आईएमटी) ने बाद में आवंटित हुई 11 हजार 503 वर्ग गज जमीन की कीमत जमा किए बगैर ही पक्का निर्माण कर लिया। ऐसे में यह निर्माण प्राधिकरण के अधिकारियों की मिलीभगत से तो नहीं हुआ, इस मामले की पूरी जांच होगी। इसके लिए जीडीए उपाध्यक्ष ने अपर सचिव की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई है।
भाजपा पार्षद राजेंद्र त्यागी ने आईएमटी पर सरकारी जमीन कब्जाने का आरोप लगाते हुए जीडीए से शिकायत की थी। इस शिकायत का संज्ञान लेते हुए जीडीए उपाध्यक्ष ने सचिव की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई। जांच में पाया कि आईएमटी के पास 11 हजार 503 वर्ग गज जमीन के दस्तावेज नहीं है। प्राधिकरण ने यह जमीन तो सोसाइटी को आवंटित कर दी मगर इसका पैसा जमा होने पर कोई ध्यान नहीं दिया। साथ ही आईएमटी ने प्राधिकरण ने इस जमीन का नक्शा पास करा लिया और वहां हॉस्टल बना लिया।
मंगलवार को जीडीए सचिव ने इस जमीन का आवंटन रद्द करते हुए जमीन वापस देने का आदेश जारी कर दिया है। लेकिन सवाल उठता है कि जब जमीन का पैसा जमा ही नहीं हुआ तो इसपर निर्माण कैसे हो गया। अधिकारियों की है मिलीभगतआईएमटी की आवंटन रद्द जमीन का पैसा जमा नहीं होने के बाद भी इस पर निर्माण होने से प्राधिकरण के अधिकारी शक के दायरे में आ गए हैं। अगर जमीन का पैसा जमा नहीं हुआ था, तो प्राधिकरण ने इसका नक्शा कैसे पास कर दिया और इस जमीन पर निर्माण किसके इशारे पर हो गया। इस पूरे मामले से प्राधिकरण का नियोजन और प्रवर्तन अनुभाग के तत्कालीन अधिकारी फंसते नजर आ रहे हैं।
अधिकारियों की जांच होगीजीडीए उपाध्यक्ष कंचन वर्मा ने इस जमीन का नक्शा पास करने और यहां निर्माण होने के वक्त जो अधिकारी नियोजन व प्रवर्तन अनुभाग में तैनात थे, उनकी जांच कराने के लिए कमेटी बनाई गई है। अपर सचिव की अध्यक्षता में बनाई कमेटी 10 दिन में अपनी जांच रिपोर्ट जीडीए वीसी को सौंपेगी।नक्शा होगा निरस्तजीडीए के अधिकारियों का कहना है कि जमीन का आवंटन रद्द होने के बाद नक्शा भी निरस्त माना जाता है। लेकिन प्राधिकरण अपने दस्तावेजों में भी इसे निरस्त करेगा। इसकी कार्रवाई जल्द हो जाएगी।
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