हापुड़ विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष पर करोड़ों रुपये के विकास शुल्क को वसूलने की जगह बिल्डरों व कालोनाइजर को फायदा पहुंचाने का आरोप


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लखनऊ | हमेशा विवादों में रहने वाले प्राधिकरण के उपाध्यक्ष गया प्रसाद पर एक और भ्रष्टाचार का आरोप लगा है। यह आरोप सत्ता के विधायक विजय पाल आढ़ती ने लगाया है। उन्होंने उपाध्यक्ष पर प्राधिकरण को मिलने वाले करोड़ों रुपये के विकास शुल्क को वसूलने की जगह बिल्डरों व कालोनाइजर से सांठगांठ कर उन्हें फायद पहुंचाने का आरोप लगाया है।  विधायक के लगाए आरोप उस समय और मजबूत हो गए। जब कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार ने प्राधिकरण की 22 सितम्बर को ली 55वीं बोर्ड बैठक में प्राधिकरण की तरफ से आकार डेवपलर्स पर 3 करोड़ 90 लाख रुपये की धनराशि को माफ करने के प्रस्ताव को खारिज करते हुए, उन्होंने एक माह के अंदर विकास शुल्क वसूलने का आदेश दिया था।

पांच माह बीत जाने के बाद भी उक्त कालोनाइजर पर कोई कार्रवाई नहीं होने पर विधायक के आरोप को बल मिलता है। 18 बकायेदारों की एक लम्बी लिस्ट है। 25 करोड़ 72 लाख 64 हजार 265 रुपये का विकास शुल्क बकाया है, जिसको प्राधिकरण क्यों नहीं वसूल रहा है। ऐसे कुछ सवाल हैं जो प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को संदेह के घेरे में लाते हैं।

बता दें, हापुड़ सदर विधानासभा क्षेत्र से विधायक विजय पाल आढ़ती ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया है कि हापुड़ पिलखुवा विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि चंडिका एसोसिएट, आकार डवलपर्स, पिलखुवा स्थित गोपाल डेयरी, सरस्वती एनक्लेव आदि में पूरी तरह से कार्यशैली संदेह के घेरे में है।

वह गरीब आम जनता का कोई काम नहीं करते हैं। आरोप है कि उपाध्यक्ष के पास हापुड़ के विकास की कोई योजना तक नहीं है। उनके पास सरकार विरोधी व्यक्तियों का जमावड़ा रहता है। विधायक विजयपाल आढ़ती ने शिकायती पत्र में गुहार लगाई है कि मामले की जांच कराकर उपाध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई कराए जाने की कृपा करें। इस मामले में मुख्यमंत्री ने संज्ञान लेते हुए हापुड़ डीएम से रिपोर्ट तलब की है। जिसमें डीएम ने हापुड़ एसडीएम को जांच सौंप दी है।

इस संबंध में भाजपा विधायक विजयपाल आढ़ती ने बताया कि हापुड़ पिलखुवा विकास प्राधिकरण के वीसी काम नहीं कर रहे हैं, बल्कि सरकार विरोधी कार्यों को तवज्जों दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री से शिकायत की गई है। जिनके खिलाफ कार्रवाई की नांग की गई है।


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