
आयोग ने कहा कि यदि आरोप सही हैं तो यह पीड़िता के परिवार के मानवाधिकार हनन का गंभीर मुद्दा बनता है। आयोग ने एक विज्ञप्ति में कहा कि उसे पुलिस महानिदेशक से इस स्पष्टीकरण की भी उम्मीद है कि हिरासत में मौत की जानकारी आयोग को 24 घंटे में क्यों नहीं दी गयी। जेल में भर्ती के समय मृतक की स्वास्थ्य जांच रिपोर्ट और जेल अधिकारियों की ओर से उसे मुहैया कराये गये उपचार का ब्यौरा भी भेजना होगा। जवाब के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है।
मीडिया खबरों के हवाले से आयोग ने कहा कि कथित बलात्कार पीडिता के पिता की संदिग्ध परिस्थितियों में हिरासत में मौत के ठीक एक दिन पहले पीडिता ने मुख्यमंत्री आवास के निकट आत्मदाह का प्रयास किया था। उसने भाजपा के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उनके सहयोगियों पर गैंगरेप का आरोप लगाया है। युवती का आरोप है कि उसके पिता को विधायक के इशारे पर मारा गया है क्योंकि वह गैंगरेप की अपनी शिकायत वापस लेने की इच्छुक नहीं थी। युवती का आरोप है कि विधायक ने उसके पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी है।
आयोग ने कहा कि खबरों के मुताबिक युवती ने अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए 17 अगस्त 2017 को मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। उसे मदद का आश्वासन मिला था लेकिन उसके बावजूद अंत में ऐसा घटनाक्रम हो गया। आयोग ने कहा कि मीडिया खबरों के मुताबिक पुलिस हिरासत में दो दिन गुजारने के बाद युवती के पिता की जांच करने वाले डाक्टरों ने उसके शरीर पर चोट के 19 निशान पाये। युवती के पिता को अस्पताल तभी ले जाया गया, जब उसकी हालत बिगड़ने लगी।
https://rashtriyadinmaan.com
