लखनऊ । लखनऊ विकास प्राधिकरण मे सब कुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है, उपर से भला शांति दिख रही है पर अंदर ही अंदर अधिकारियों व कमचारियाें मे आपसी गुटबाजी, तालमेल मे कमी, व साजिशाें का दाैर चल रहा है. मुख्य अभियंता मनीष सिंह भले चले गये हैं पर उन्होंने ने एलडीए कायपणाली पर कई सवाल जरूर खडें कर दिए हैं.
मुख्य मंत्री जिस विभाग के मंत्री है ,उस एलडीए मे आज कल सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. हमेशा से सरकार की पाथिमकता वाले विभाग में गत कई माह से विकास कायाें मे भारी कमी आई है , जिससे उसकी आमदनी
जहां काफी कम हो गई है पर खर्च बढ गये हैं. इससे अधिकारी , कर्मचारी दाेनाें ही चितित है आने वाले समय में उनकाें वेतन मिलने तक लालें पड सकतें.
एलडीए का पूरा जाेर बस मुख्य मंत्री पाेजेकटाें काे पूरा करने पर है, पिछले दिनों कई माह के बाद जनता के लिए कुछ नई याेजनाओ की घाेषणा जरूर की गई लेकिन वह पूरी हाेगी या नहीं , अभी दुविधा है.
वतमान समय मे एलडीए मे अधिकारियों व कर्मचारियों के बीच साजिशाें व तालमेल की भारी कम चल रही है . जिसका पूरा असर काम काज पर पड रहा है.
अब बात करते है मुख्य अभियंता मनीष सिंह की. मनीष सिंह की एलडीए मे तैनाती का आदेश नहीं था. उनहे लगभग एक साल पहले ही एलडीए से रिलीव कर दिया जाना चाहिए था. लेकिन उनहें रिलीव नहीं किया गया. बिना तैनाती व काम के हर माह एलडीए से उन्हें वेतन व भतताें के रूप में लगभग सवा लाख रुपये महीना मिलता रहा.
फिर आपसी टकराव के चलते मनीष सिंह को मुख्य अभियंता दाे, मानते हुए उनहें कायाें का आबंटन कर दिया गया. मामला जब उपर तक पहुँचा तो एलडीए काे अपने कदम इस मामले में पीछे खीचनें पड़े.और मनीष सिंह काे विदा हाेना पड़ा.
लेकिन इस पूरे प्रकरण ने एलडीए की कायशैली की पाेल खाेल दी कि , कितनी हडबडाहट मे मनीष सिंह को मुख्य अभियंता बना कर कायाें काे दाे मुख्य अभियंताओ के बीच बांटा गया. यहाँ यह भी पता करने की ज़रूरत महसूस नहीं की गई की नगर विकास के मनीष सिंह की एलडीए मे तैनाती है भी कि नहीं. शासन से भी नहीं पूछा गया.मनीष सिंह यहाँ पर कैसे हैं, इसका पता करने की भी ज़रूरत भी नहीं समझी गई.
सिपहसलहाराें ने भी इस मामले में नहीं चेताया.
अब सवाल यह भी है कि मनीष सिंह काे बिना तैनाती के वेतन भत्ता जाे लगभग पनदह लाख के आसपास कुल हाेता है किस मद से और किसके आदेश के दिया जा रहा था.उनहें अब तक रिलीव कयाें नहीं किया गया. क्या बिना तैनाती के वेतन देने की एलडीए अब रिकवरी करेगा.इस पकरण मे दाेषी लाेगाें काे किसी भी दशा में बकशना नहीं चाहिए .कयाेकि इस तरह के और भी मामलें हाे सकतें है.
मनीष सिंह पकरण ने एलडीए की छवि को भी पभावित किया है. नगर विकास के और अभियंता जो पधिकरण मे है, उन्हें वापस किया जाना चाहिए एलडीए मे अब अभियंताओ की कमी नहीं है.
वही, अधिकारियों के बीच सब कुछ ठीक ना हाेने के चलते कई छुट्टी पर चले गये हैं कुछ काे काम ऐसे दिया गया है की वह किनारे हो गये हैं.
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