आगामी चुनाव में वन अधिकार कानून को मुद्दा बनाने वाले दलों समर्थन करना होगा—–तीस्ता सीतलवाड़


 

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वनाधिकारों की अनदेखी पर प्रदेश स्तरीय जनसुनवाई

 

लखनऊ |   वन एवं भू अधिकार अभियान, उत्तर प्रदेश द्वारा “उत्तर प्रदेश मे वनाधिकारों की अनदेखी व वनविभाग एवं पुलिस द्वारा वनाश्रित समुदाय के उत्पीड़न” को लेकर एक दिवसीय प्रदेश स्तरीय जनसुनवाई का आयोजन  गांधी भवन के मुख्य सभागार कैसरबाग लखनऊ में किया गया !

इस जनसुनवाई में सोनभद्र, ललित पुर मिर्जापुर चंदौली महाराजगंज गोरखपुर चितकूट जालौन बहराइच लखीमपुर पीलीभीत सहारनपुर बिजनोर तथा उत्तराखंड मध्य प्रदेश और बिहार के वन क्षेत्रों में वन विभाग द्वारा वन अधिकार कानून की अनदेखी किए जाने का मुद्दा उठा ।

सोनभद्र से श्यामलाल और लालती पासवान, शोभा, किस्मती, सुकालो देवी, बहराइच से सोमवारी यादव और जंग बहादुर, , चित्रकूट से मतादायल, राममिलन, भोला, जालौन से अरविन्द प्रहरिया लखीमपुर खीरी से बंगो देवी आदि ने अपने ऊपर हुए अत्याचारों को व्यक्त किया उन्होंने कहा कि वन विभाग प्रशासन और पुलिस के साथ मिलकर लगातार हम वन समुदाय  और आदिवासी लोगों के साथ अत्याचार कर रहा है । फर्जी मुकदमों में हमारे छोटे-छोटे बच्चों तक के लोगों को फसाया जा रहा है वन अधिकार कानून के तहत सामुदायिक दावा करने वालों को जेल भेजने का काम वन विभाग कर रहा है़। इस जनसुनवाई में जूरी में शामिल पूर्व न्यायाधीश मुंबई हाई कोर्ट वीजी कोलसे पाटील ने अपने वक्तव्य में कहा कि उत्तर प्रदेश में वन क्षेत्र के निवासियों की स्थिति बेहद गंभीर है और सरकार को इस ओर पर पर्याप्त ध्यान देना चाहिए।

प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ ने कहा की हमें अपनी राजनीतिक शक्ति को मजबूत करना होगा और आगामी चुनाव में वन अधिकार कानून को मुद्दा बनाने वाले दलों समर्थन करना होगा। सभी राजनीतिक पार्टियों को वन अधिकार कानून को अपने घोषणापत्र में शामिल करने के लिए मजबूर करना होगा। फर्जी मुकदमो को वापिस करने के लिए जुडिशल कमीशन बनाना होगा और वनाधिकार कानून पर संसद में विशेष संसदीय सत्र को बुलाने के मांग रखना चाहिये,

सामाजिक कार्यकर्ता संदीप पांडे ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जमीनों के बंदरबांट के मामले सामने आए हैं और वनवासियों की अपेक्षा पूंजीपतियों और सामंतो को जमीने बांटी गई हैं।

पूर्व पुलिस महा निरीक्षक जीपी कनौजिया ने कहा कि वनाश्रित समुदाय की अनदेखी सरकारों के लिए महंगी पड़ सकती है लोगों को अपने अधिकारों के लिए किसी अन्य मार्ग को चुनना पड़े यह दुर्भाग्यपूर्ण होगा। सरकार को सभी अधिकार लागू करने के लिए पहल करनी चाहिए सुश्री रोमा जी ने कहा कि महिलाओं के ऊपर पिछले कुछ वर्षों में वन विभाग के आतंक बड़े हैं।

इलाहाबाद हाई कोर्ट केस प्रतिष्ठित अधिवक्ता फरमान ने कहा कि सिर्फ न्यायिक प्रक्रिया से वन अधिकारों को लागू किया जाना संभव नहीं होगा इसमें जन शक्ति को मजबूत किया जाना अति आवश्यक है।

अशोक चौधरी ने पीड़ित समुदाय को न्याय दिलाने में जनसुनवाई के महत्व के बारे में विस्तार से बताया।

कार्यक्रम का संचालन सामाजिक कार्यकर्ता जंग हिंदुस्तानी ने किया।


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