
लखनऊ. उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने आरोप लगाया है कि सरकार ने बड़े घरानों को लाभ देने के लिए 50 लाख ग्रामीण उपभोक्ताओं के बिलों में बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है.
इसके साथ ही उन्होंने बताया कि सरकार पहले से जानती थी कि अप्रैल में निजीकरण कर दिया जाएगा, जिसके तहत बिलों में बढ़ोतरी अप्रैल में किए जाने की योजना तैयार कर ली गई थी. बतादें कि जल्द ही सरकार ने ग्रामीण उपभोक्ताओं के बिलों में 34 फीसदी बढ़ोतरी करते हुए 300 के जगह 400 रूपये महीने फिक्स कर दिया है. श्री वर्मा ने कहा कि उप्र सरकार व पावर कार्पोरेशन ने बड़ी चालाकी से ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं पर बड़ा बोझ डाल दिया. अब निजी घराने भी खुशी-खुशी निजीकरण के क्षेत्र में काम करने के लिये राजी हो जायेंगे, क्योंकि अब उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ा मुनाफा प्राप्त होगा. लेकिन शायद सरकार को यह नहीं पता कि उप्र की जनता यह गोल माल जान चुकी है. इसलिये अभी भी समय है कि उप्र सरकार को बढ़ोत्तरी वापस लेना चाहिए.
विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौसिल के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा जब इस असंवैधानिक वृद्धि पर उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी जो अभी भी विचाराधीन है. उस पर पावर कार्पोरेशन की ओर से नियामक आयोग को जो जवाब भेजा गया था उसमें जो बात लिखी गयी थी वह बेहद चैंकाने वाली थी. उसमें इस मुद्दे पर यह जवाब दिया गया है कि टैरिफ शाॅक पर विचार करते हुए चरण बद्ध रूप से वृद्धि की गयी है. इसलिये आयोग द्वारा वर्ष 2018-19 के लिए भी ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं की वृद्धि द्वितीय चरण के लिये भी अनुमोदित की गयी है. सवाल यह उठता है कि जब पूरे प्रदेश में बिजली दर पर सुनवाई सभी श्रेणी के विद्युत उपभोक्ताओं के लिये वर्ष 2017-18 की की गयी और पावर कार्पोरेशन का प्रस्ताव भी इसी वर्ष के लिये था। फिर केवल गरीबों की एक श्रेणी अनमीटर्ड 50 लाख ग्रामीण घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं की दरों को वर्ष 2018-19 के लिये द्वितीय चरण के लिये वृद्धि करना पूरी तरह असंवैधानिक है. जो यह सिद्ध करता है कि निजी घरानों को लाभ देने की नियत से अप्रैल माह में सुनियोजित तरीके से वृद्धि करायी गयी थी.
उपभोक्ता परिषद ने निजी घरानों पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि उ0प्र0 पावर कार्पोरेशन शायद यह भूल गया है कि निजी घराने केवल अपने लाभ के लिये काम करते हैं. 2 दिन पहले निजी संस्था द्वारा पावर कार्पोरेशन की परीक्षा के परिणामों में धांधली प्रकाश में आने के बाद उसे निरस्त करना पावर कार्पोरेशन के इतिहास में काला अध्याय है. इसी प्रकार से निजी कम्पनी एचसीएल के सिस्टम पर बिलिंग घोटाला जिसकी जांच एसटीएफ कर रही है. निजी संस्थाओं के यह कृत्य सभी के सामने है. अभी भी पावर कार्पोरेशन में लगभग 100 करोड़ रूपये के निजी कन्सल्टेन्ट रखे गये हैं जो तथाकथित सुधार में लगे हैं. अभी भी समय है पावर कार्पोरेशन को निजी घरानों व निजी संस्थाओं की चिन्ता छोड़ जनता की चिन्ता करनी चाहिए.
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