
अनुदानित,स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के स्ववित्तपोषित अनुमोदित शिक्षको का अविलम्ब हो भौतिक सत्यापन
lucknow | अनुदानित महाविद्यालय स्ववित्तपोषित अनुमोदित शिक्षक संघ ईकाई सुल्तानपुर के जिलाध्यक्ष डां.जितेन्द्र कुमार त्रिपाठी द्वारा कुलपति एवं कुलसचिव अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद से मांग किया हैकि विश्वविद्यालय परिक्षेत्र के अनुदानित एवं स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में कार्यरत स्ववित्तपोषित अनुमोदित शिक्षको का विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित/महाविद्यालयों द्वारा अग्रेषित सूची के अनुरुप अविलम्ब भौतिक सत्यापन करवाया जाय।
इस सन्दर्भ में इसके पूर्व भी डां.त्रिपाठी द्वारा अपने प्रेषित पत्र दिनांक 23.06.2018 के आधार पर अविलम्ब भौतिक सत्यापन की मांग कुलपति व कुलसचिव अवध विश्वविद्यालय से की गयी थी,जिस पर अभी तक विश्वविद्यालय द्वारा कोई कार्यवाही शुरु नहीं की जा सकी है। डां.त्रिपाठी ने इस कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि यदि कुलपति अवध विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा और विश्वविद्यालय की पारदर्शिता की बात करते है और इस दिशा में सराहनीय कार्य भी कर रहे है,तो तत्काल प्रभाव से 31 जुलाई 2018 तक सभी अनुदानित एवं स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में कार्यरत अनुमोदित शिक्षको का स्थलीय भौतिक सत्यापन अनुमोदन पत्र, नियुक्ति पत्र, आधार नम्बर,पैन नम्बर, वेतन स्टेटमेंट, विगत तीन वर्ष की महाविद्यालय उपस्थिति पंजिका एवं सम्बन्धित शिक्षक की विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयीय गतिविधियों व परीक्षा सम्बन्धी कार्यो की संलग्नता के आधार पर अनिवार्य रुप से भौतिक सत्यापन सुनिश्चित करवाया जाय। क्योंकि महाविद्यालयों द्वारा विश्वविद्यालय के कतिपय अधिकारियों एवं कर्मचारियों की साठ गांठ से ऐसे ऐसे लोगो का विवरण महाविद्यालय स्तर से अग्रिषित कर अनुमोदित शिक्षक के रुप में विश्वविद्यालय सूची में शामिल करा दिया है, जो कि न तो कभी सम्बन्धित महाविद्यालय में कार्यरत रहे है और न हैं।
यह कितना हास्यप्रद हैकि महाविद्यालय प्रबन्धक/प्राचार्य द्वारा जिसका भी डाटा स्ववित्तपोषित अनुमोदित शिक्षक के रुप में अग्रेषित कर दिया गया, उसे ही विश्वविद्यालय द्वारा अनुमोदित शिक्षक स्वीकार कर लिया गया। महाविद्यालय प्रबन्धन की मिलीभगत व धनबल के दबाव में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा यह भी जांच करना मुनासिब नहीं समझा कि महाविद्यालय द्वारा अग्रेषित शिक्षक वास्तव में विश्वविद्यालय द्वारा अनुमोदित है या नहीं ? इसी का परिणाम हैकि विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित अनुमोदित शिक्षको की सूची में विश्वविद्यालय परिक्षेत्र के अनुदानित अशासकीय महाविद्यालयो के आधा दर्जन वित्तपोषित स्थायी शिक्षको/प्राचार्यों को भी स्ववित्तपोषित अनुमोदित शिक्षक/प्राचार्य की सूची रुप में शामिल कर लिया गया है। दूसरी तरफ कुलपति प्रो.मनोज दीक्षित, अवध विश्वविद्यालय के अनुसार विश्वविद्यालय क्षेत्रान्तर्गत कुल 630 महाविद्यालय है,जिसमें पूर्व विश्वविद्यालय मीडिया प्रभारी व वर्तमान कुलसचिव प्रो.यस.एन.शुक्ला के अनुसार विश्वविद्यालय परिक्षेत्र के 130 कालेज शिक्षक विहीन एवं 100 कालेज प्राचार्य विहीन है। तो सवाल यह हैकि क्या शेष 500 कालेजों में शिक्षक और 530 कालेजो में प्राचार्य कार्यरत है ? स्वयं विश्वविद्यालय की ही बेबसाइट के अनुसार अभी तक विश्वविद्यालय से सम्बद्ध कुल 382 कालेजो द्वारा शिक्षको का एवं 286 कालेजो ने ही कार्यरत प्राचार्यो का विवरण उपलब्ध कराया है।
आखिर जब विश्वविद्यालय की स्वयं की बेबसाइट के अनुसार ही स्पष्ट हैकि अभी तक 248 कालेजो ने शिक्षको व 384 कालेजो ने प्राचार्यो का विवरण ही नहीं उपलब्ध कराया है तो मात्र 130 कालेजो का ही प्रवेश प्रतिबन्ध करना समझ से परे है।
विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा मात्र 130 महाविद्यालयो के विरुद्ध तो शिक्षक विहीनता के कारण एक तरफा कार्यवाही तो की गयी लेकिन इन महाविद्यालयों को बिना प्राचार्य व शिक्षक के ही दशको से अपनी छत्रछाया में लिफाफा लालसा की लिप्सा में संचालन का प्रश्रय देने वाले विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकरियों एवं बिना शिक्षक व प्राचार्य के ही कक्षा शिक्षण की अनुमति व अनुमोदन प्रदान करने वाले पैनल के अधिकारियों/स्थायी शिक्षको पर कोई कार्यवाही क्योंकि नहीं की गयी ?
डां.त्रिपाठी ने स्पष्ट किया हैकि अवध विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित 4468 अनुमोदित शिक्षक एवं 286 अनुमोदित प्राचार्यों की सूची में आज भी बहुत बड़ा फर्जीवाड़े का खेल शामिल है। अनुदानित एवं स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में कार्यरत अनुमोदित शिक्षको की प्रकाशित सूची में ही सैकड़ों ऐसे शिक्षको का नाम शामिल है जो अनुमोदन के बाद से ही सम्बन्धित महाविद्यालयों में अद्यतन कार्यरत ही नहीं है या फिर अन्य सरकारी व गैर सरकारी विभागो में वर्षो से सेवारत है। फिर भी अवध विश्वविद्यालय ऐसे लोगो को अपना अद्यतन कार्यरत अनुमोदित शिक्षक मान रहा है। जिसकी निष्पक्ष जांच/भौतिक सत्यापन कर कुलपति अवध विश्वविद्यालय को पारदर्शितापूर्ण स्थिति को 31 जुलाई तक स्पष्ट करना ही होगा, अन्यथा की स्थिति में शिक्षक संघ व्यापक आन्दोलन के लिए बाध्य होगा जिसकी सम्पूर्ण जबावदेही विश्वविद्यालय प्रशासन की ही होगा।
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